अजहरुद्दीन को राहत ने पैदा किया कांग्रेस पर शक?

 Mohd Azharuddin's life ban from cricket is illegal said Andhra High Court so What was the Reson Behind This.
बैंगलोर। भारत के सफल कप्तानों में से एक लेकिन क्रिकेट के लिए बीता हुआ कल साबित हो चुके मशहूर क्रिकेटर मोहम्मद अजहरूद्दीन को बड़ी राहत मिली है। उन पर बीसीसीआई की ओर से लगाये गये आजीवन प्रतिबंध को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूरी तरह से गलत ठहराया है। जिसके बाद से अजहर को मैच फिक्सर के रूप में देखना भी अब शायद बेमानी होगा। हालांकि यह न्यायपालिका का फैसला है और हम जिस देश में रहते हैं वहां कानून से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इसलिए न्यायपालिका पर अंगुली भी उठाना संविधान का अपमान करना है।

लेकिन फिर भी हाईकोर्ट के फैसले ने दिल में शक जरूर पैदा कर दिया है। आज करीब 12 साल बाद अजहर के ऊपर से लगे प्रतिबंध को गलत ठहराया गया है। आज क्रिकेट से बहुत दूर हो चुके अजहर मियां राजनैतिक गलियारे के चमकते सितारे हैं। वो देश की सत्तासीन सरकार यानी कांग्रेस के मजबूत सिपाही के रूप में गिने जाते हैं। अजहर ने उस क्षेत्र से चुनाव लड़ा है जहां कि एबीसीडी भी शायद उन्हें ठीक से पता नहीं है।

जन्म से हैदराबादी अजहर मियां कांग्रेस के टिकट पर यूपी के मुरादाबाद से सांसद हैं। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण अजहर को अल्पसंख्यक वोटों का प्रेम मिला जिसे कि कांग्रेस ने पूरी तरह से भूनाया है। हमेशा अपने भाषण में कांग्रेस की ओर से कहा गया कि वो किसी दागदार चरित्र को टिकट नहीं दे रही है बावजूद इसके उसने अजहर पर दांव खेला और सफल भी हुई।

कांग्रेस की ओर से हमेशा कहा गया कि अजहर पर अभी इल्जाम साबित होना बाकी है, मामला न्यायपालिका में है और जब फैसला आ जाये तब आप अजहर को दागदार कहिये। और आज फैसला आ गया और अजहर के लिए बीसीसीआई को ही दोषी ठहरा दिया गया है।

अभी पिछले हफ्ते बीएसपी सुप्रीमो मायावती को भी ताज कारिडोर मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है, बरसों से करोड़ो के घोटालों में घिरी मायावती को भी हाईकोर्ट से राहत मिल गयी है। दोनों ही केस अलग-अलग हैं लेकिन सोचने वाली बात यह है कि दोनों ही फैसलों में हाईकोर्ट ने मामले को गलत ठहराया है। और यह दोनों फैसले तब आये हैं जब कांग्रेस मुसीबतों के जाल में फंसी हुई है।

ममता बैनर्जी के साथ छोड़ने के बाद बीएसपी ने ही केन्द्र सरकार का साथ दिया है वरना यूपीए का किला ढह जाता और हो सकता है कि ताज कारिडोर मामला बंद होना उसी साथ का ईनाम हो लेकिन अजहर के मामले में अभी खुलकर कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि अजहर को कांग्रेस किस बात का ईनाम दे रही है इसकी कलई खुलना अभी बाकी है।

दूसरी ओर इंडिया अंगेस्ट करप्शन के लोग हमेशा से न्यायपालिका पर सवाल खड़े करते रहे हैं। न्यायापालिका पूरी तरह से न्यायिक हो इसलिेए वो लोकपाल बिल के अंदर इसे लाने की बात करते रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से हमेशा इस बात से इंकार किया गया है।

हमारा मकसद कोर्ट के फैसलों पर सवाल खड़ा करना नहीं है लेकिन देश के हालात और सरकार के रवैये को देखने के बाद दिल यह कहने पर मजबूर हो जाता है कि क्या वाकई में यह फैसले सही है? आप क्या सोचते हैं अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।अजहर के बारे में पढने के लिए क्लिक करें

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