कालेज आना है तो स्कार्फ पहनकर आओ

कानपुर शहर में एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल ने कक्षा छह से बारह तक की लड़कियों के लिये स्कार्फ पहनना जरूरी कर दिया गया है। कॉलेज ने कहा है कि इस आदेश का पालन नहीं करने वाली छात्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध इस कॉलेज की प्रिसिंपल कमर शाहीन का कहना है कि स्कूल के प्रबंधन ने यह फैसला किया है कि 2 नवंबर से स्कूल में कक्षा छह से कक्षा 12 तक की सभी छात्राएं स्कार्फ बांधकर आएंगी। उन्होंने कहा कि स्कार्फ न बांधने से बेपदर्गी होती है। यह आदेश सभी छात्राओं पर लागू होगा चाहें वह किसी धर्म की भी हो।
प्रिसिंपल कमर शाहीन के अनुसार कालेज प्रबंधक फरहत हुसैन ने आदेश दिया है कि जो भी छात्रा स्कार्फ पहनने में आनाकानी करें उसे पहले चेतावनी दी जायें यदि सुधार न हो तो उसके कॉलेज में आने पर प्रतिबंध लगा दिया जायें। इस तालिबानी फैसने के बारे में उनका तर्क हैं कि यह फैसला तालिबानी नही है बल्कि इस्लामी तहजीब के दायरे में है और हम इसे हर हालत में अपने कॉलेज में लागू करेंगे। कानपुर की कमिश्नर शालिनी प्रसाद ने ऐसी कोई जानकारी होने से इंकार करते हुए कहा कि अभी तक उनके संज्ञान में ऐसा कोई भी मामला नहीं है।
उधर मुस्लिम जुबिली गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाध्यापिका ने बताया कि उनके स्कूल में करीब दो हजार छात्राएं है जिसमें 90 फीसदी से अधिक छात्राएं मुस्लिम हैं। कॉलेज में दस प्रतिशत छात्राएं दूसरे संप्रदाय से भी हैं। उनका कहना है कि कालेज में मोबाइल फोन पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की शिक्षिकाओं के भी स्कूल परिसर में मोबाइल लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब तक अगर कोई छात्रा मोबाइल लाती थी तो उसका मोबाइल जब्त कर लिया जाता था। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिक्षिका मोबाइल फोन ले आती है तो उसे प्रिसिंपल आफिस में जमा करना होगा वरना उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जायेंगी।












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