केजरीवाल का खुलासा, देश मनमोहन नहीं मुकेश अंबानी चला रहे हैं

सबको चौकते हुए केजरीवाल ने मुकेश अंबानी की कंपनी मिले केजी बेसिन के ठेके और उसमें हुई गड़बड़ियों का मामला उठाते हुए सरकार के कंपनी के सामने नतमस्तक होने का आरोप मढ़ा। केजरीवाल ने गड़बडि़यों के बारे में खुलासा करते हुए कहा कि रिलांयस ने 2000 में सवा दो डॉलर यूनिट के हिसाब से जिस गैस सप्लाई का वादा किया था उसके लिए दो साल बाद सवा 4 डॉलर मांग लिए और अब सवा 14 डॉलर मांग रही है। उन्होंने कहा कि सरकार रिलायंस की ये मांग पूरी भी कर रही है, जबकि रिलायंस अपने गैस कारोबार की ऑडिट करवाने को भी तैयार नहीं है। आखिर, सरकार ने रिलायंस का कॉन्ट्रेक्ट रद्द क्यों नहीं किया।
इतना ही नहीं अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने आरोप लगाते हुए कहा कि तत्कालीन कैबिनेट गठन में नीरा राडिया दखल दे रही थी और इस दावे की पुष्टि करने के लिये टीम केजरीवाल ने राडिया और अटल बिहार वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य की बातचीत का ऑडियो टेप भी सुनाया। केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अपने संवाददाता सम्मेलन के अंत में केजरीवाल ने कुछ सवाल पूछे। सवाल इस प्रकार हैं: सरकार कौन चला रहा है? ऐसा लगता है टेलीकॉम कंपनियां अपनी पसंद का दूरसंचार मंत्री और आरआईएल अपनी पसंद का पेट्रोलियम मंत्री चुन रही हैं?, क्या सरकार को ताकतवर औद्योगिक घराने चला रहे हैं?, क्या मनमोहन सिंह किसी मजबूरी में औद्योगिक घरानों के हाथ में खेल रहे हैं या अनदेखी कर रहे हैं। अगर कोई मजबूरी है तो वह क्या है?












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