ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए रिश्वत मांगते हैं डीजीपी

प्रदेश का पुलिस महकमा भ्रष्ट अधिकारियों का गढ़ बन चुका है और यहां सिपाही से लेकर एसएसपी व डीजीपी तक सभी पैसे मांगते हैं। यह आरोप लगाने वाला कोई जनता का प्रतिनिधि नहीं बल्कि 38वीं वाहिनी पीएसी अलीगढ़ में तैनात सीओ विजय कुमार शर्मा था। विजय कुमार द्वारा एक निजी टेलीविजन चैनल पर दिए गए अपने बयान में जब डीजीपी समेत कई बड़े अधिकारियों के नाम लिए तो अलीगढ़ से लेकर लखनऊ तक सभी के होश उड़ गए। देखते ही देखते पुलिस उपाधीक्षक विजय कुमार शर्मा को देर रात निलंबित करने का आदेश जारी हो गया और उन्हें आरटीसी चुनार से सम्बद्ध किया गया।
राज्य के प्रमुख सचिव गृह आर.एम. श्रीवास्तव ने कहा कि विजय कुमार शर्मा द्वारा खबरिया चैनल के समक्ष वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध वेतन न देने के सम्बन्ध में भ्रष्टाचार सम्बन्धी आधारहीन, मनगढन्त और मिथ्या अरोप लगाए गए हैं तथा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया। उन्हें अनुशासनहीनता तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 में उल्लिखित प्राविधानों के उल्लंघन के आरोप में निलम्बित किया जा रहा है। श्री शर्मा को निलम्बित तो कर दिया गया लेकिन उन्होंने जो आरोप लगाए उससे सरकार की छवि पर दाग जरूर लगा। श्री शर्र्मा ने अपने बयान में कहा कि 11 महीने में उनका पांच बार तबादला किया गया और वेतन भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन को उच्च अधिकारियों के पास नहीं भेजा गया। श्री शर्मा ने आला अधिकारियों पर खुलेआम भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए तथा कि कई अधिकारी सपा नेताओं के पैर छूकर अपनी नौकरी कर रहे हैं। उनके इस प्रकार के आरोपों में विभाग में आग लगा दी है तथा अखिलेश यादव के पुलिस महकमें में चल रहे गोरखधंधों को भी जनता के बीच बेनकाब कर दिया।












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