दो सौ महीने सात सरकारें लेकिन नहीं हटा दबंगों का कब्जा

मुजफ्फरनगर (शामली) जिले में झझाना इलाके के चौसाना गांव की चार हजार बीघा सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। एक सरकारी स्कूल के शिक्षक मास्टर विजय को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया और अधिकारियों से शिकायत की लेकिन बात नहीं बनीं। आखिरकार उन्होंने 26 फरवरी 1996 में मुजफ्फरनगर की कचहरी के निकट इस अवैध कब्जे के विरोध में धरना शुरू कर दिया। इस 17 साल के अन्दोलन में यदि कुछ नहीं बदला तो वह हैं मास्टर विजय सिंह की वह उम्मीद जिसके सहारे वह प्रतिदिन धरने पर बैठते हैं कि शायद आज कोई आदेश आ जाए। यह जुनून कि वह गरीबों को दी जाने वाली जमीन को बडे असरदार लोगों के कब्जे से मुक्त करा लेंगे ही उन्हें ऊर्जा देता है। लोग कहते हैं कि विजय सिंह सरकारी स्कूल में शिक्षक थे बेहतर वेतन था सब कुछ आराम से चल रहा था लेकिन न जाने उन्होंने क्यों धरना दे दिया।
धरना खत्म कराने के कई सरकारी जतन हुयें लेकिन जमीन खाली कराने के लिए किसी ने कोई कारगर कदम नहीं उठाया। लंबे धरने के कारण उनकी सरकारी शिक्षक की नौकरी भी चली गयी लेकिन उनक नाम के साथ मास्टर शब्द जुड़ गया। अब तो उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है। पिछले अप्रैल माह वह शामली से छह सौ किलोमीटर पैदल चलकर लखनऊ आए और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ज्ञापन प्रेषित किया। मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात जनता दरबार में हुई। मुख्यमंत्री ने तीन सदस्यीय उच्च अधिकारियों की कमेटी बनाकर सरकारी जमीन पर कब्जे तथा उसे मुक्त कराने के आदेश जारी किये लेकिन कुछ नहीं हुआ। मालूम हो कि वर्तमान पुलिस महानिदेशक तथा तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ए.सी.शर्मा ने खुद इस मामले की जांच की थी। जांच में पता चला कि कुछ दबंगों ने चार हजार बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। कम असरदार लोगों से चार सौ बीघा जमीन को मुक्त भी कराया गया लेकिन बाकी जमीन पर कब्जा बरकरार है।












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