मनरेगा के पैसों से खरीदे गए ब्लैकबेरी मोबाइल

देशभर में मनरेगा योजना इसलिए लागू की गई ताकि ग्रामीण क्षेत्र के उस वर्ग को रोजगार हासिल हो सके, जिनके लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाना कठिन हो पाता है। भूमिहीन ग्रामीणों को फसली सीजन के कारण वर्ष के कई माह खाली बैठना पड़ता है, जिसकी वजह से उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं होता। केंद्र सरकार द्वारा 100 दिन की रोजगार गारंटी दी गई ताकि गरीब परिवार अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण आसानी से कर सकें। केंद्र सरकार की इस योजना से गरीब परिवारों के जीवन में परिवर्तन भी आया। लेकिन इस योजना के क्रियान्वयन में सरकारी अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी भी चलानी शुरू कर दी।
आरटीआई से हासिल जानकारी में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मनरेगा योजना के तहत लगभग एक दर्जन मोबाइल खरीदे गए। तत्कालीन जिला उपायुक्त ने 6 जून 2010 को इस योजना की राशि से खरीदा गया ब्लैकबेरी-9700 मॉडल का मोबाइल हासिल किया, जिसे 28 हजार 500 रुपये में खरीदा गया था। कहने की आवश्यकता नहीं की प्रशासनिक अधिकारी के पास पहले से भी (व्यक्तिगत) मोबाइल होगा। (यह जांच का विषय है कि अन्य योजनाओं के तहत भी उन्होंने मोबाइल खरीदे होंगे)।
भारी-भरकम वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारी द्वारा मनरेगा स्कीम से अपने इस्तेमाल के लिए मोबाइल खरीदा गया। आरटीआई में मिली जानकारी में यह दर्शाया गया है कि नोकिया (मॉडल सीआई-01) के 8 मोबाइल 2350 रुपये की दर से खरीदे गए। जबकि एक मोबाइल नोकिया (एक्स-2-01) मॉडल 3800 रुपये में खरीदा गया। जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि इन मोबाइल को नेहरू युवा केंद्र (सिरसा, डबवाली, ओढ़ा, चोपटा, ऐलनाबाद, रानियां, बड़ागुढ़ा क्षेत्र में योजना क्रियान्वित करने के लिए) को सौंपा गया है।












Click it and Unblock the Notifications