सैन्य खरीद में सनसनीखेज खुलासा, 1 अरब की गड़बड़ी

रिपोर्ट में यह बात सामने आने के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने खर्चों पर सख्त नियंत्रण एवं संतुलन का आदेश दिया है। बहरहाल, थलसेना ने खरीद में हुए 100 करोड़ के नुकसान की बात से इनकार कर इस बात पर जोर दिया कि किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट ने 2009 से 2011 के बीच हुए करीब 55 खरीद फैसलों को परखा। इस दौरान बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध दूरबीनों की ऊंचे दाम पर विदेश से खरीद, चीनी मूल के संचार उपकरणों की खरीद से लेकर दूध खरीदे जाने जैसे कई फैसलों को कठघरे में खड़ा किया गया है। आपात जरूरतों के तहत कमान प्रमुखों को विशेष वित्तीय अधिकारों के तहत 125 करोड़ रुपये तक की खरीद के अधिकार हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच के घेरे में आए खरीद फैसलों में पूर्वी कमान प्रमुख के तौर पर मौजूदा सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह के निर्णयों को भी आंका गया है।
सेना मुख्यालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि सभी निर्णय कमांड स्तर पर समेकित वित्तीय सलाहकार (आइएफए) के अनुमोदन से ही लिए गए हैं। साथ ही पारदर्शी बोली प्रक्रिया का भी पालन किया गया है। सेना मुख्यालय के अनुसार इस संबंध में रक्षा महालेखा नियंत्रक की ओर से उठाए गए सभी सवालों का सिलसिलेवार जवाब भी दे दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय अपने मातहत सभी महकमों के वित्तीय प्रबंधन को सुधारने की कवायद शुरू कर चुका है। सेना की डिटेक्टिव विंग ने संचार उपकरणों की खरीद के संबंध में कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक ये सारी खरीद उन नियमों का उल्लंघन करके की गई है। ऐसे में फिजूलखर्ची के साथ साथ देश की सुरक्षा से भी समझौता किया गया है।












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