तीसरी बहस में ओबामा ने रोमनी पर बढ़त बनायी

हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार दोनों ही दावेदारों के बीच कड़ी प्रतिद्वंदिता है। 90 मिनट की बहस में विदेश नीति से जुड़े मुद्दे छाये रहे। इन मुद्दों मे चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाये जाने और ईरान को परमाणु बम न बनाने की अनुमति देना जैसे मुद्दे छाये रहे। जिसमें ईरान मुद्दे पर दोनों ही सहमत हो गये। साथ ही इस पर भी सहमति जतायी गई कि 2014 तक अफगानिस्तान से सेनाओं की वापसी होनी चाहिए। बहस में लीबिया और सीरिया के मुद्दों पर दोनों ने एक दूसरे पर हमले किये लेकिन पिछली बहस में मुख्य तौर पर उठाये गये लीबिया मुद्दे पर बहस नहीं की गई।
ओबामा ने बहस में पहली बार यह भी बताया कि एबटाबाद में ओसामा को मारने के लिए पाकिस्तान से अनुमति नहीं ली गई क्योंकि ऐसा करने से उसके बच निकलने के आसार थे। रोमनी ने पाकिस्तान को सशर्त सहायता देने की बात की लेकिन पूर्णत: रिश्ते तोड़ने से मना कर दिया। वहीं ओबामा ने इस मुद्दे पर कहा कि पाकिस्तान अपने हालातों के कारण हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके पास 100 से ज्यादा परमाणु हथियार हैं और वह और ज्यादा हासिल करने की कोशिशों में हैं। ऐसे में यह भी संभावना है कि उसके पास एक समय ब्रिटेन से भी ज्यादा परमाणु हथियार होंगे।
रोमनी ने यमन और अफगानिस्तान से सेना वापसी के मुद्दे पर ओबामा का समर्थन किया। इसके अलावा रोमनी ने ओबामा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज चार सालों के बाद अमेरिका का विश्व में प्रभाव वैसा नहीं है जैसा पहले था। हमारे ऊपर 20 खरब डॉलर का कर्ज है और मुद्रास्फीति बढ़ती जा रही है। रोमनी ने यह भी कहा कि हम चाहते हैं कि विश्व के अलग-अलग देशों में संघर्ष हो रहे हैं लेकिन हम इन सबका मानवता पूर्ण हल चाहते हैं। लेकिन दुनिया के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अमेरिका को नेतृत्व करना होगा।
ओबामा ने इस दौरान अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन और ईराक में खत्म हुए युद्ध का जिकर किया और कहा कि आतंकवाद को भी खत्म करने पर हमने दोबारा ध्यान केंद्रित किया।
सीबीएस न्यूज द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार 53 फीसदी लोगों ने ओबामा और 23 फीसदी लोगों ने रोमनी के विजयी होने के कयास लगाये।












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