पीछे रह गईं सोनिया गांधी, ईयू को 2012 का नोबल शांति पुरस्कार

पिछले महीने भारत सरकार ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिये सोनिया गांधी का नाम प्रस्तावित किया। भारत के इंटरनेशनल अवेकनिंग सेंटर ने पहली बार नहीं बल्कि नवीं बार सोनिया का नाम इस पुरस्कार के लिये भेजा। नाम प्रस्तावित करते हुए भारत ने सोनिया को विश्व शांति की पुजारी एवं एक महान सामाजिक कार्यकत्री के रूप में प्रेषित किया। लेकिन नोबल पुरस्कार चुनने वाली समिति को भारत की ये बातें रास नहीं आयीं।
इस साल यह पुरस्कार यूरोपिय संघ को विपरीत आर्थिक परिस्थितियों से जूझते हुए अपने लक्ष्य में सफलता पाने के लिये दिया गया। नोबल प्राइज़ कमेटी के चेयरमैन थोरजोर्न जागलैंड ने इस पुरस्कार की घोषणा ओस्लो में की।
जागलैंड ने कहा कि यह यूरोप के लिये एक संदेश है कि वे खुद को सुरक्षित रखते हुए हर काम कर सकते हैं और अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। अगर यूनियन सही ढंग से एवं सूझ-बूझ के साथ काम नहीं करती, तो पूरे विश्व में आर्थिक संकट गहरा जाता।
उन्होंने 27 देशों के संघ की सराहना की। इस संघ का गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था। 10 दिसंबर को संघ को 12 लाख डॉलर का पुरस्कार दिया जायेगा।












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