अखिलेश समाप्त करेंगे अंग्रेजों के लगाए लगान को

ज्ञात हो कि राज्य के किसानों पर अंग्रेजों ने जो कर लगाया था उसे आजादी के 65 वर्ष बाद भी वसूला जा रहा है लेकिन प्रदेश की सपा सरकार अब इसे समाप्त कर देना चाहती है। सरकार की मंशा के अनुरूप राजस्व विभाग अब किसानों को लगान के दायरे से बाहर कर देगा। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट के सामने प्रस्ताव लाया जाएगा। राज्य सरकार किसानों से तीन तरह के कर वसूलती है। इसमें भू-राजस्व, सिंचाई कर व अन्य विविध कर। सभी तरह के करों से सरकार को प्रतिवर्ष करीब 1079 करोड़ रुपये की आय होती है।
लगान से 146 करोड़, सिंचाई से 778 करोड़ और विविध करों से 155 करोड़ रुपये की आय होती है। लगान की धनराशि के निर्धारण को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति रहती है और कई बार लगान के लिए किसानों का उत्पीडऩ भी होता है। किसानों को शोषण से निजात दिलाने के लिए लगान को खत्म करने पर विचार चल रहा है। सूत्रों के अनुसार लगान की वसूली के कार्य में लगे राजस्व विभाग के संग्रह अमीनों और अन्य स्टाफ पर राज्य सरकार का जो खर्च आता है, उसकी बहुत कम धनराशि लगान के रूप में आती है। एक यह भी वजह है कि राज्य सरकार लगान खत्म करने पर विचार कर रही है।
चकबंदी विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 1,25,716 गांव हैं, जिनमें अधिकतर की चकबंदी हो चुकी है। चकबंदी में खेतों के चक छोटे हो जाने के कारण वर्तमान में लगभग डेढ़ करोड़ किसानों से ही लगान लिया जा रहा है। सरकार सैद्धान्तिक रूप से चकबंदी को समाप्त करने का पहले ही फैसला ले चुकी है और इसके क्रियान्वयन को लेकर राजस्व मंत्री अम्बिका चौधरी राजस्व परिषद और चकबंदी विभाग के कर्मचारी संगठनों के साथ पहले दौर की बातचीत भी कर चुके हैं। चकबंदी विभाग का राजस्व परिषद में विलय करके चकबंदी को खत्म किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में मांग के अनुसार चकबंदी होगी।












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