अमूल और मदर डेयरी ने उड़ायी पराग की नींद

प्रदेश के बाजार में पराग, अमूल और मदर डेयरी के दूध का मुकाबला कर सके इसके लिये पैङ्क्षकग को आकर्षक बनाया जायेगा। पराग का उत्पादन करीब तीस साल पहले शुरू हुआ था लेकिन इसके पैकिंग को अब पहली बार बदला जायेगा। पराग के विपणन को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने भारतीय प्रबन्ध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ को सौंपी है। आईआईएम पराग के बाजार को और बेहतर बनाने की अपनी रिपोर्ट प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन (यूपीपीसीडीएफ) को देगा।
इसके पैङ्क्षकग को बदलने की जिम्मेदारी अहमदाबाद ने नेशनल इंस्टीच्यूट आफ डिजायन (एनआईडी) को दी गयी है। वैसे अगर इन तीनों दूध उत्पादों के कलेवर पर गौर करें तो अमूल और मदर डेयरी अपनी पैङ्क्षकग में आकर्षक दिखते हैं जबकि पराग की पैङ्क्षकग अच्छी नहीं कही जा सकती। पराग क्रीम और क्रीम रहित दूध के अलावा खीर, मक्खन, घी, खोवा, पनीर, पेडा, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, कलाकंद और दही बनाता है।
सूत्रों की मानें तो आईआईएम अपनी रिपोर्ट आगामी अक्टूबर के अंत तक यूपीपीसीडीएफ को दे देगा। अहमदाबाद की एनआईडी जल्द ही अपना काम शुरू करेगी और एक महीने में पैकिंग को आकर्षक बनाने के बारे में बतायेगा। वहीं अमूल का उत्पाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मिर्जापुर स्थित दक्षिणी परिसर में जल्द ही शुरू होने वाला है जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिल्ली की मदर डेयरी की पहुंच हो गयी है।
अभी तक उत्तर प्रदेश के दूध के बाजार में पराग का एकाधिकार था। वैसे अमूल का दूध उत्तर प्रदेश में बिक रहा है और लगातार लोकप्रिय भी होता जा रहा है। पराग की चिंता अमूल के उत्तर प्रदेश में उत्पादन शुरू होने से हो रही है। पराग की 59 जिलों में प्रसंस्करण इकाईयां हैं जिनमें 33 घाटे में चल रही हैं जबकि चार बंद हो चुकी हैं।












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