वॉलमार्ट के आने से देश को होने वाले 10 फायदे

वैसे तो विदेशों में तमाम रिटेल कंपनियां हैं, लेकिन हम वॉलमार्ट की बात इसलिये कर रहे हैं, क्योंकि यह कंपनी भारत आ चुकी है। वो भी भारती ग्रुप के साथ साझे में। इसके कुछ स्टोर बेस प्राइस के नाम से खुल भी चुके हैं। केंद्र सरकार की नीतियां लागू होने के तुरंत बाद देखते ही देखते दिल्ली, मुंबई ही नहीं बल्कि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, पटना से लेकर रांची तक वॉलमार्ट के स्टोर खुल जायेंगे। 3-टीयर शहरों की बात न भी करें कम से कम 2-टीयर शहरों में तो वॉलमार्ट के स्टोर हर इलाके में आपको मिलेंगे।
किसे होगा फायदा-
सबसे बड़ा फायदा पहुंचेगा किसान को
वर्तमान में दाल-चावल, आदि को खेतों से किराना स्टोर तक पहुंचने में कई जगह बिचौलियों का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले बिचौलिये मिलत हैं मंडी में, जहां किसान अपना अनाज बेचता है। दूसरे खुदरा बाजार में। फिर थोक विक्रेता की एजेंसियां अपना कमीशन खाती हैं और तब जाकर एक फुटकर विक्रेता के पास अनाज पहुंचता है। खेतों से दुकान तक पहुंचते-पहुंचते करीब 40 फीसदी अनाज बर्बाद हो जाता है। यानी किसान की आधी मेहनत बर्बाद।
वॉलमार्ट जैसी कंपनियां अनाज सहित सभी वस्तुएं सीधे किसानों से खदीरेंगी और उन्हें वर्तमान से ज्यादा दाम देंगी। चूंकि ये कंपनी कोल्ड चेन मैनेजमेंट में सर्वश्रेष्ठ है, इसलिये अनाज हो या सब्जियां या फिर दुग्ध उत्पाद। सामान खराब होने से पहले सुरक्षित ढंग से स्टोर तक पहुंचेगा। चूंकि कंपनियों को 70 प्रतिशत सामान भारत से ही खरीदना होगा इसलिये किसानों को जबर्दस्त फायदा होगा।
दूसरा फायदा आम जनता को
वर्तमान में वृहद स्तर पर दलाली और गोदामों में अनाज भरने की परंपरा के कारण बाजार में आते-आते खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान तक चले जाते हैं, कि आम जनता का बजट बिगड़ जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वॉलमार्ट स्टोर में मिलने वाली वस्तुओं के दाम वर्तमान से कम होंगे, यानी खाद्य वस्तुओं के दामों में निश्चित तौर पर गिरावट आयेगी।
तीसरा फायदा लोगों के स्वास्थ्य को
आज अगर आप किसी किराना स्टोर से कोई खाने की वस्तु लाते हैं और मिलावट के कारण उसे खाने से तबियत बिगड़ जाती है, तो आप ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्य विभाग में कंप्लेन करेंगे, लेकिन आपके पास कोई सबूत नहीं होगा। वॉलमार्ट जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा क्वालिटी पर ध्यान देती हैं, यानी देश के बाजारों से मिलावट खोरों का पत्ता साफ हो जायेगा। चूंकि लोगों के स्वास्थ्य के प्रति कंपनी की जवाबदेही होती है, इसलिये कोई कंप्रोमाइज़ नहीं करतीं।
चौथा फायदा बेरोजगार युवाओं को
खुदरा बाजार में 51 फीसदी प्रत्यक्ष निवेश आने से 51 लाख बेरोजगारों को तुरंत नौकरी मिलेगी। एक या दो साल में संख्या बढ़कर 1 से डेढ़ करोड़ हो जायेगी। हम आपको बता दें कि उन सभी शहरों में स्टोर्स खुलेंगे, जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। इनमें मेट्रो सिटीज़ के अलावा लखनऊ, कानपुर, नागपुर, अहमदाबाद, पुणे, आगरा, इलाहाबाद, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, आदि कई शहर आते हैं। विदेशी कंपनियां देश में यदि 50 हजार स्टोर खेलती है, तो इस हिसाब से सीधे 50 लाख लोगों की आवश्यकता होगी। यदि रिटेल स्टोर की संख्या आगे चलकर बढ़ती है तो करीब 1 करोड़ नौकरियों की संभावनाएं बनेंगी।
पांचवा फायदा लघु उद्योगों को
देश के वो लघु उद्योग जो क्वालिटी को मेनटेन रखते हुए उत्पाद बनाते हैं, वे अपना माल सीधे वॉलमार्ट जैसी कंपनियों को दे सकत हैं, जिन्हें वो खुद की ब्रांडिंग करके अपने स्टोर में बेचेगी। खास बात यह है कि ऐसे में उन्हीं उद्योगों को फायदा पहुंचेगा जो ईमानदारी से काम करेंगे, बेईमान व्यापारियों के लिये कोई जगह नहीं होगी।
छठा फायदा रिटेल मैनेजमेंट स्कूलों को
2008 की आर्थिक मंदी के बाद से जिन रिटेल स्कूलों मं सन्नाटा पसरा हुआ है या फिर स्कूल बंद हो चुके हैं, वहां छात्रों की लंबी कतारें दिखाई देंगी। यह बात तय है कि इन स्कूलों की फीस भी कई गुना बढ़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि रिटेल मैनेजमेंट पढ़ाने वाले संस्थान इस मौके को गंवाने के बजाये भुनाना चाहेंगे।
सातवां फायदा देश के राजस्व को
51 फीसदी एफडीआई का एक फायदा देश की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा, क्योंकि इसमें सरकार को अच्छी मात्रा में राजस्व मिलेगा। इसका अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी।
आठवां फायदा घरेलू उद्योगों को
देश में हस्त कला व हस्त शिल्प का बोलबाला है। सिर्फ सही मार्केटिंग नहीं हो पाने के कारण शिल्पकारों व हस्तशिल्प कारों की कला को सही मोल नहीं मिल पाता है। ज्यादा से ज्यादा सरकार इनके लिये साल में एक बार हस्तशिल्प मेला लगवा देती है। लेकिन अगर वॉलमार्ट के स्टोर में इनके उत्पाद रखे जायें तो उन्हें कितना सही मोल मिले।
नवां फायदा प्राकृतिक संपदा को
चाहे अनाज हो या दूध या फिर खाने की अन्य वस्तुएं सच पूछिए तो ये देश की प्राकृतिक संपदा ही हैं। वॉलमार्ट जैसी कंपनियां जितना इंवेस्टमेंट उत्पादों को स्टोर में सजाने पर करती हैं, उससे कहीं ज्यादा इंवेस्टमेंट कोल्ड चेन मैनेजमेंट पर करती हैं। यानी जो अनाज सड़कों, गोदामों में सड़ जाता है, वो सीधे लोगों तक पहुंच सकेगा।
10वां फायदा खुद विदेशी कंपनी को
जी हां इतना सब करने के बाद हमारा देश तो तरक्की की राह पर निकल पड़ेगा, लेकिन उसका सारा श्रेय और अंतिम लाभ वॉलमार्ट जैसी कंपनियां ले जायेंगी। यही कारण है कि तमाम राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन हमारा सवाल यह है कि क्या टाटा, बिरला, रिलायंस, विप्रो, जैसी भारतीय कंपनियों में इतना बूता क्यों नहीं है, कि बिना विदेशी सहयोग के वो खुद वॉलमार्ट जैसे स्टोर चला सके। इन कंपनियों में अनाज को सड़ने से बचाने का दम क्यों नहीं है? और अगर दम नहीं है, तो विदेशी कंपनी को अवसर देने से हम क्यों रोकें? अगर वो चार पैसे कमाकर हमारे देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूत कर सकती है, तो हम एफडीआई का समर्थन करते हैं।












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