यूपी अंधेरे में तो मुलायम के इटावा को 24 घंटे बिजली क्‍यों?

Samajwadi Party chief Mulayam Singh Yadav
लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूछा कि आखिर क्या कारण है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत कई मंत्रियों व सांसदों के गृह जनपद में 24 घंटे बिजली क्यों दी जा रही है। कोर्ट ने केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) से उत्तर प्रदेश को की जाने वाली बिजली आपूर्ति के बारे में चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

ज्ञात हो कि न्यायालय में हिन्दू पर्सनल लॉ बोर्ड के अशोक कुमार की याचिका पर सुनवाई हो रही है। श्री कुमार ने याचिका दायर की थी कि इटावा, मैनपुरी, रामपुर, कन्नौज, रायबरेली व अमेठी में बगैर कारण 24 घंटे बिजली दी जा रही है जबकि अन्य जिलों को इससे महरूम रखा जा रहा है।

राजधानी को अपवाद स्वरूप छोड़ दिया जाए तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बाहर से चौदह घंटे ही बिजली मिल रही है जबकि कुछ वीआईपी जिलों को बिजली कटौती से दूर रखा गया है। उपरोक्त जिलों को कटौती से अलग क्यों किया गया जबकि वहां ऐसा कुछ भी नहीं जिसके आधार पर उसे वीआईपी जिला कहा जाए। इस बात को उठाते हुए हिन्दू पर्सनल ला बोर्ड की ओर से अशोक पांडेय ने न्यायालय में एक याचिका दायर की जिसमें कहा गया कि राजनीतिक कारणों से राज्य के छह जिलों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है।

इन जिलों में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गृह जिले इटावा, सपा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र मैनपुरी, सपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री आजम खां के गृह जिले रामपुर, मुख्यमंत्री की पत्नी सांसद डिम्पल यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी को शामिल किया गया है जहां 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है।

याचिका में राज्य के धार्मिक जिले वाराणसी, इलाहाबाद व फैजाबाद समेत पर्यटन स्थलों पर 24 घंटे बिजली देने की अपील की गयी है। याचिका में कहा गया है कि राज्य के अन्य जिलों में रहने वालों का क्या कसूर है कि उन्हें दस से बारह घंटे ही बिजली क्यों दी जा रही है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश अमिताभ लाला और न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ ने केन्द्रीय नियामक आयोग को चार सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश देते हुये कहा कि इसके बाद ही मामले की सुनवाई की अगली तारीख तय की जायेगी।

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