अंडरग्राउंड हुए उत्तर प्रदेश के घोटालों के बादशाह

प्रदेश की पिछली बसपा सरकार में श्रम मंत्री रहे श्री सिंह ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टïाचार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि जो भी हो रहा है वह सब राज्य सरकार के इशारे पर किया जा रहा है। पूर्व मंत्री श्री सिंह घोटाले में खुद का नाम शामिल होने सम्बन्धी खबरों के प्रकाश में आने और मामले की जांच शुरु होने की सूचना मिलते ही महोबा के अपने गृहनगर खरेला से गुपचुप ढंग से गायब हो गए हैं। प्रशासन को व उनके करीबियों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि वह मध्य प्रदेश में किसी स्थान पर चले गए है लेकिन स्पष्टï तौर पर कोई कुछ नहीं बता पा रहा है। मालूम हो कि भ्रष्टाचार और सरकारी जमीनों को अवैध तरीके से कब्जाने के मामले में लोकायुक्त की जांच के बाद श्री सिंह को मंत्री पद खोना पड़ा था। उन्हें स्वयं मुख्यमंत्री मायावती ने पद से हटा दिया था तथा विधानसभा चुनाव में टिकट भी नहीं दिया था। अब लेपफैड घोटाला उनके लिए नयी मुसीबत लेकर आया है। आरोप है कि राज्य के चुङ्क्षनदा शहरों में श्रमिकों के लिये पड़ाव की स्थापना के लिये केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजना का कार्य लेपफैड को देने के बदले श्री सिंह ने रिश्वत ली।
लगभग एक सौ करोड़ की इस परियोजना से श्रमिक हितों की पूर्ति होनी थी। लेपफैड के अधिशासी अभियन्ता डी.के.साहू ने मामले की चल रही जांच पड़ताल में पुलिस अभिरक्षा में दर्ज कराये गये अपने बयानों में बादशाह सिंह के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है। पुलिस की सहकारिता इकाई ने इस बात की जानकारी के बाद पूर्व मंत्री श्री सिंह से पूछताछ करने की मंशा जताई, जिसके बाद श्री सिंह गायब हो गए।
श्री सिंह के अज्ञातवास में जाने की खबर के सार्वजनिक होने के बाद उनके गृह जनपद खरेला कस्बे में सनसनी फैल गयी। दबंग छवि के पूर्व बादशाह सिंह के खिलाफ महोबा जिले के खरेला में सरकारी भूमि को कब्जाने का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्हें लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद सुश्री मायावती ने बर्खास्त कर दिया था। श्री सिंह बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हो गये थे। उन्होनें विधान सभा चुनाव भाजपा प्रत्याशी के रुप में महोबा विधान सभा सीट से लड़ा था लेकिन वह जीत न सके।












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