प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से 8 महत्वपूर्ण सवाल

हम गर्दन के साथ वो आरियों के साथ।
सेहत हमारी ठीक रहेगी तो किस तरह,
आते है हकीम बिमारियों के साथ।
मशहूर कवि बैचन सियासी की पक्तियों के साथ देशवासी (एक पक्ष) दूसरे पक्ष (सत्ता) से कुछ सवाल पूछ रहे है। चाहे रेल या बस का सफर हो, चाय या पान की दूकान हो, घर या बाजार हो जहां भी लोगों का एकत्रिकरण होता है सरकार से लोग हजारों सवाल पूछ रहे है। हजारो लोग हजारो सवाल मगर हम सराकर (मनमोहन सिंह) के 8 साल पर 8 ही सवाल पूछ रहे है। तमाम बिमारियों के साथ भारत के प्रधानमंत्री (हकीम) डा0 मनमोहन सिंह ने तृणमूल कांग्रेस के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद शुक्रवार की रात टेलिविजन पर राष्ट्र के नाम अपना सम्बोधन दिया। डा. मनमोहन सिंह ने कहां कि ''पैसे पेड़ पर नहीं उगते'' अब रोजगार एफडीआई के माध्यम से देंगे।
केवल दानों बातों पर ही गौर किया जाये तो यहां बेशक आम आदमी के लिए पैसे पेड़ पर नही उगते लेकिन कांग्रेस पार्टी तथा कारपोरेट सेक्टर के लिए पैसे पेड़ पर उगते है। कारपोरेट घराने तो अपनी पसंदीदा नीतियों के कारण पेड़ों पर से पैसे तोड़ रहे है। कांग्रेस अपना घोषण पत्र देखे उसमें कहा था हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार देंगे। साल 2009 में कहां कि एक करोड़ नौकरियां देंगे। क्या ऐसा हुआ है? युवकों, किसानों, व्यापारियों, महिलाओं सब के माथे पर चिन्ता की लकीरें साफ दिखायी पड़ती है। कभी हाथ में हुक्के उठा कर चुटकी में राजनीति के फैसले लेने वाले किसान क्यों गहरी सोच में डूबे है।
सिटी से हाट सिटी का सफर तय करते-करते विकास की रेल अब उल्टी दौड़ रही है। लालची लोभी आंखो से बचे हुए खेतों और घरोदों को रौंद रही है। कमाई के फेर में उलझी हुई सरकारों की अनदेखी और बिगड़ी कानून व्यवस्था के साईड इफैक्ट ऐसे आए कि आपके 8 सालों के शासन में भ्रष्टाचार ने उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किए है। कारखाने सिमट रहे है। नौजवान नौकरी के लिए और किसान अपनी बची हुई जमीन बचाने के लिए व महिलायें रोज बढ़ती मंहगाई लूट-खसौठ तथा अपनी हिफाजत के लिए संघर्षरत है। नेता वोट मांग रहे है और जनता उनको सड़क, बिजली, पानी, गुंडों और लूटेरों से मिले जख्म दिखा रही है। ऐसे हालातों पर जितना कहां जाये लिखा जाए कम पड़ेगा।
प्रधानमंत्री जी ध्यान रखीये ''मजदूरों का खून पसीना लेकर ऊंचे महल खड़े होते हैं, मिटते लाखों छोटे-छोटे तब कुछ लोग बड़े होते है" आपने जो एफडीआई और डीजल व रसोई गैस को और मंहगा करने का निर्णय लिया। 20 सितम्बर के भारत बंद और ममता बेनर्जी के सरकार से हटने ने इसे गलत ठहराया है फिर भी आप है कि मानते नही। यदि जनता नही चाहती है तो आप क्यों जिद पर जिंदा हो। लगता ऐसा है कि सिर्फ स्वयं सफलता पा लेना ही एक मात्र उद्देश्य हो गया।
राजनीति के गालियारों में नेताओं का फर्ज खोया
जिधर देखिये उधर खराबी अपने पांव पसार रही
आज बुराई से अच्छाई हर बाजी को हार रही
राजनीति हो गई कलंकित कुछ उल्टे-सीधे वादों से
उन्मादी भी हुए पराजित नेताओं के उन्मादों से
मनमोहन जी से आठ सवाल
1- मशहूर स्थापित उद्योगपति टाटा को अरबपति बनने में 100 साल लगे दूसरे उद्योगपति स्व धीरूभाई अम्बानी के रिलायंस समूह को 50 साल लगे लेकिन यूपीए की चेयरमैन व कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी के दामाद प्रियंका गांधी के हसबैंड राबर्ट वाड्रा को मात्र 10 साल लगे। यह आश्चर्य जनक है। क्या इनकी इस ग्रोथ का कारण आपका 8 साल का कार्यकाली योगदान रहा या नही तो इसका कारण और क्या?
2- बोर्फोस दलाली में ली गई रकम जो ब्रिटेन के एक बैंक में जमा थी। भारत सरकार बोर्फोस के दलाल, सोनिया गांधी परिवार के अन्दर जिनकी गहरी पैठ है इसी कारण उनका उनके यहां बेरोक-टोक आना जाना रहता है। उसके फ्रिज बैंक एकाउंट को जिसपर सीबीआई ने अटल बिहारी बाजपेयी के समय रोक लगाई थी। आपके प्रधानमंत्री बनने के बाद देशहित में विदेशी दलाल के लिए खाते पर लगी रोक क्यों हटाई गई। क्या वह रकम भारत में आयी या क्वात्रोची ले गया?
3- चुनाव के समय आपने देश से वादा किया था कि कांग्रेस सरकार बनने के 100 दिन के अन्दर मंहगाई कम करेंगे। क्या मंहगाई की मार तब से अब तक जनता सहने को मजबूर है क्यो?
4- कांग्रेस सरकार बनने पर 1 करोड़ नौजवानों का रोजगार देंगे। क्या आपके शासन में रोजगार मिले या उन्हें उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया। नौजवानों को झूठे वादे कर युवाओं को केन्द्र सरकार ने ठगा हैं।
5- राष्ट्रपति के चुनाव में आपकी पार्टी कांग्रेस ने उसकी नजरों में साम्प्रदायिक पार्टी भाजपा की सबसे प्राचीन सहयोगी शिवसेना व जनता दल (यू) से समर्थन लिया आपकी नजरों में क्या हैं ?
6- आपके शासन में गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी, कुपोषण, शोषण, निरक्षरता नहीं बढ़ी है। सेना का मनोबल आपकी नीतियों के कारण नहीं गिरा है। उत्तर देते वक्त पूर्व सेनाध्यक्ष मेजर जनरल बीके सिंह का कार्यकाल स्मरण में रहें।
7- जनवरी 2011 में पाकिस्तान में सलमान तसीर की हत्या हुई और उनके हत्यारे को मौत की सजा सुना दी गई उसको 1 वर्ष में फांसी भी दे दी गई। लेकिन संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू तथा मुम्बई हमले के कसूरवार कसाब को अभी भी जेल में बिरयानी व खीर खिलाई जा रही है क्यों?
8- 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला जो सिद्ध हो चुका है, आपकी कैबिनेट के कबीना मंत्री ए राजा यूपीए की प्रमुख सहयोगी द्रमुक के राष्ट्रीय अध्यक्ष तामिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि की पुत्री सांसद कनीमोझी सहित अन्य भी जेल गये, मुम्बई में कारगील शहीदों के परिवारों के लिए बनायी गई योजना आर्दश सोसायटी में आपके नेताओं ने बंदर बांट की जिसके परिणाम स्वरूप महाराष्ट्र में दो-दो मुख्यमंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा। दिल्ली में आयोजित कॉमन वेल्थ खेलों में भारी धांधली की गई। आपकी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी व अन्य जेल गए। इसी प्रकार अब तक घोटालों की पुरानी श्रंखला के बनाए गये रिकार्डो को ध्वस्त करते हुई कोलगेट घोटाला जिसमें स्वयं सीएजी ने 1.86 हजार लाख करोड़ की राजस्व हानि बताया है। आपने भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के आपने वादे को निभाया या भ्रष्टाचार मुक्त की जगह युक्त करने की नीति अपनाई।
मनमोहन जी मनुष्य मान, सम्मान, सुख-शान्ती तभी पाता है जब वह अपने लिए जैसा व्यवहार चाहता है वैसा ही दूसरों के साथ भी करें। जब हम आचरण को ही दपर्ण बना लेंगे तब हममें मानवता के एक कदम आगें देवत्व के गुण विकसित होने लगेंगे। जो भी इस राह पर चले महामानव बन गए अमृत को प्राप्त कर अमर हो गए। भारत के प्रधानमंत्री रहे वो भी कांग्रेस पार्टी से स्व. लाल बहादुर शास्त्री जी वो अमर है क्योकि उनकों हल्कापन गंवारा न था जुबान में न आवाम में न निजाम में न शायरी में न शख्सियत में। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई व पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भारत की जनता की आंखों के तारे है और रहेंगे क्योकि उनको भी पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री जी तरह हल्कापन कभी गवांरा नही रहा।
अंत में सिर्फ इतना ही कि-
जिस दिन जिस घड़ी स्वयं को सम्मान देना सिख जाओगे,
लिखकर देता हूं उसी दिन आसमान से ऊंचा अपना कद पाओगे,
खुद खाना नही दूसरों को खिलाना सिख जाओंगे,
तभी से मालिक की खुशबू का अहसास खूद में पाओंगे,
वो लेना नही देना सिखाता है नित भारत का साधु सुंफी यह कथाओं में बताता है
फूलों के रंग से दिल की कलम से तुझको लिख रहा हूं यह पाती,
कैसें बताऊ तुझे किस तरह पल-पल तेरी सत्ता भारतवासियों को सताती
लेखक परिचय: नरेन्द्र सिंह राणा, भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं।












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