एफडीआई पर संसद में प्रस्ताव लाकर यूपीए को घेरेगी तृणमूल

ममता बनर्जी के इस निर्णय के बारे में मीडिया को बताते हुए उनके सहयोगी सांसद सौगाता रॉय ने कहा, "प्रधानमंत्री आम तौर पर 26 जनवरी या 15 अगस्त पर या फिर किसी आपातकालीन परिस्थिति में ही देश को संबोधित करते हैं। एफडीआई के मामले पर ऐसी क्या आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई कि पीएम को माइक उठाना पड़ा। और तो और उन्होंने अपने संबोधन में एक भी बात ढंग की नहीं कही।"
सच पूछिए तो यह संबोधन यूपीए के अंदर के आपात को दर्शा रहा है। प्रधानमंत्री के भाषण से साफ लग रहा था कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यूपीए सरकार है।
रॉय ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाये तृणमूल कांग्रेस किसी भी हालत में रिटेल सेक्टर में विदेशी निवेश का समर्थन नहीं करेगी। बल्कि इसका विरोध 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। टीएमसी के कार्यकर्ता इसकी शुरुआत दिल्ली से करेंगे और फिर अन्य राज्यों में भी विरोध दर्ज किया जायेगा। जरूर पढ़ें- पवार थप्पड़ भूल गये, चिदंबरम जूता और राहुल चप्पल, मनमोहन भी भूल जायेंगे शर्ट।












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