तीन माह से कमरे में बंद महिला को कराया मुक्त
नई दिल्ली। अंधविश्वास के चलते दिल्ली के जैतापुर में एक महिला को पति ने तीन महीने तक एक कमरे में बंद करके रखा। पति को लगता था कि पत्नी पर भूत-प्रेत का साया मंडरा रहा है। शनिवार दोपहर महिला के परिजनों ने क्षेत्रीय सभासद और अन्य लोगों की मदद से उसको बाहर निकाला। महिला की हालत बहुत ही दयनीय बताई जा रही है, उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अभी इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। जैतापुर क्षेत्र के मीठापुर विस्तार के एफ ब्लाक में दीपक अपनी पत्नी कविता (32) 3 बच्चों और दो भाईयों के परिवार के साथ यहां रहता है। वर्ष 1999 में दोनों की शादी हुई थी। दीपक अपने मकान में ही जनरल स्टोर चलाता है। मकान के सबसे पीछे वाले कमरे में कविता नजरबंद पाई गई थी।
कुछ महीने से कविता की मां अपने भाई सोहनलाल से बताती थी कि उसका दामाद उन्हें बेटी से ना तो मिलने देता है, और ना ही फोन पर बात कराता है। शनिवार को सोहनलाल कोटला के प्रधान अशोक बंसल के साथ दोपहर दीपक के घर पहुंचे। वहां उन्हें कविता के मिलने के लिए रोक दिया गया। इसके बाद मौजूद प्रधान ने क्षेत्र के पार्षद और आस-पास के लोगों को बुला लिया। इस घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई।
सबके दबाव में जब दीपक ने कविता का कमरा खोला, तो नजारा कंपा देने वाला था। कमरे में पड़ी कविता की हालत बेहद दयनीय थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। उसको देखकर ऐसा लगा रहा था कि कई दिनों से खाना-पानी नहीं दिया गया है। उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि वह बोल भी नहीं पा रही थी। जब उससे कुछ पूछा जा रहा था, तो वह इशारों में जवाब दे रही थी। महिला को होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कविता की मां ने कहा कि उनको लगातार कई महीने से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा था।












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