देसी राहुल 'लूजर' तो विदेशियों पर हमला क्यों?
लेख में लिखा है कि राहुल गांधी के पास अक्ल नहीं हैं और ना ही उनके पास देश को चलाने की क्षमता है। केवल गांधी सरनेम के आधार पर उन्हें देश की सत्ता नहीं सौंपी जा सकती है लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस राहुल गांधी को साल 2014 में पीएम सीट के उम्मीदवार के रूप में पेश करेगी।
जहां राहुल गांधी पर की गयी इस टिप्पणी पर विपक्ष मजे लूट रहा है और यूपीए लेख को अनदेखा कहने की बात कह रही है वहीं एक चौंकाने वाली बात सामने आयी है। 'द इकोनॉमिस्ट' में छपा लेख एक भारतीय लेखिका की किताब पर आधारित है।
इस किताब का नाम है 'डिकोडिंग राहुल गांधी'। जिसमें साफ तौर पर राहुल गांधी को लूजर कहा गया है। किताब में लिखा है कि पिछले आठ साल से जब से राहुल ने राजनीति में कदम रखा है तब से उनसे एक करिश्मे की उम्मीद की जा रही थी लेकिन अभी तक राहुल ने कुछ नहीं किया।
एक चमत्कार तो दूर उन्होंने जहां-जहां अपने कदम रखे वहां-वहां कांग्रेस गच्चा खा गयी। और तो और उनके समय-समय पर दिये गये बयान उनकी बौद्धिक क्षमता का परिचय दे गये जिससे यह साबित हो गया कि कांग्रेसी युवराज को अक्ल कम है। इसी कारण राहुल गांधी बड़ी जिम्मेदारी संभालने से बचते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब भारतीय की किताब राहुल गांधी को लूजर बता रही है तो 'द इकोनॉमिस्ट' को लेकर हो-हल्ला क्या मचाना?
इस बारे में आपकी क्या राय है? अपनी बात नीचे लिखे कमेंट बॉ्कस में दर्ज कराये।













Click it and Unblock the Notifications