एक पैर से अरूणिमा ने नाप दी हिमालय की ऊंचाई

ट्रेन से फेंके जाने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गई। एम्स में इलाज के दौरान उनकी जान तो बच गई, लेकिेन बायां पैर काटना पड़ा था। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस दौरान अरूणिमा को हिमालय पर फतह करने का ख्याल कैसे आया। इस बारे में अरूणिमा ने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान एक दिन वह अखबार पढ़ रही थी। उसमें उन्होंने देखा कि नोएडा का एक 17 वर्षीय अर्जुन वाजपेयी ने देश के सबसे युवा पर्वतारोही बनने का कीर्तिमान हासिल किया है।
इस खबर को पढ़कर उनके अंदर जोश भर गया। उनको ऐसा लगा कि जब 17 साल का युवक ऐसा कर सकता है तो वह क्यों नहीं? धीरे-धीरे उनकी इच्छा और प्रबल होती गई। अरूणिमा ने इस बारे में एवरेस्ट की ऊंचाई छूने वाली दुनिया की 5वीं महिला बछेंद्री पाल से बात की। पाल से उनको हिम्मत मिली और उनके आत्मविश्वास को बल मिला।
उसके बाद अरूणिमा ने प्रशिक्षण का मन बनाया। उत्तराखंड स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनरिंग (एनआइएम) से उन्होंने 28 दिन का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद आइएमएफ ने उनको हिमालय चढ़ने की इजाजत दे दी।












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