सुषमा स्वराज ने कहा पीएम को इस्तीफा तो देना ही पड़ेगा

रविवार को प्रेसवार्ता कर सुषमा स्वराज ने कहा कि कोयला घोटाला देश का सबसे बड़ा घोटाला है और इसकी जांच में कोई भी कोताही बरतना देश के साथ छल होगा। सुषमा स्वराज ने कहा, "ऐसा लगता है कि घोटालों के मामले में केंद्र व राज्यों में यूपीए सरकारें एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। केंद्र सरकार ने कोयला ब्लॉक आवंटन में नीतियां बनाने में देरी की और इसी वजह से अंत में जल्दबाजी में फैसले किये गये।"
सुषमा स्वराज ने कहा, "कोयला आवंटन में जो भी धन आया वो सरकार को नहीं मिला बल्कि सीधे कांग्रेस के खाते में गया। पीएम कहते हैं कि कोयला आवंटन में जल्दबाजी इसलिये की गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा बिजली उत्पादन कर देश की जीडीपी को ऊपर किया जा सके। मैं पूछती हूं कि कोयले से जीडीपी कैसे बढ़ायी जा सकती है।"
"1993 से 2005 के बीच 70 ब्लॉक आवंटित किये गये, जबकि 2005 से 2008 के बीच 142 आवंटन हुए। अभी तक 2जी के लिये राजा, राष्ट्रमंडल खेल के लिये सुरेश कलमाड़ी दोषी पाये गये, अब तो सीधे-सीधे प्रधानमंत्री इसके लिये जिम्मेदार हैं, तो हम उनके अलावा किसका इस्तीफा मांगें," सुषमा स्वराज ने आगे कहा।
नेता विपक्ष ने बताया कि इस मुद्दे पर सोनिया गांधी से हुई मुलाकात का कोई नतीजा नहीं निकला। और यह सत्य नहीं है कि हम प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर ढीले पड़ गये हैं।












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