मोदी की सलाह- फिगर नहीं सेहत की फिक्र करें मिडल क्लास लड़कियां

गुजरात में कुपोषण के आंकडे को देखते हुए जब मोदी से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अच्छे फिगर की चाहत में लड़कियां खुद खाने से बचती हैं। इतना ही नहीं मोदी तो शाकाहार को भी कुपोषण के लिए जिम्मेदार मानते हैं। इसलिए ऐसे लोग कुपोषण का शिकार होते हैं। मोदी के इस बयान के बाद से सवाल उठने लगे हैं कि क्या सच में मध्यमवर्गीय परिवार के लोग सेहत से ज्यादा खूबसूरती को तब्बजो देते हैं? क्या मिडिल क्लास लोगों के सेहत पर भारी पड़ रहा है सौदंर्य?
इंटरव्यू के दौरान मोदी ने कहा कि अगर किसी लड़की को उसकी मां दूध पीने के लिये कहती है तो लड़की लड़ने लगती है और कहती हैं कि नहीं मैं दूध नहीं पीऊंगी क्योंकि इससे फैट बढ़ जाता है। मोदी ने साफ किया कि हम इस धारणा में परिवर्तन लाना चाहते हैं। गुजरात एक शाकाहारी प्रदेश है। इस प्रदेश में मिडिल क्लास का बड़ा तबका रहता है जिसके चलते लोग अपनी सेहत का खयाल रखते हैं। हालांकि मोदी ने एक बार फिर 2002 के गुजरात दंगों के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने कोई अपराध किया हो तभी तो वह माफी मांगेगा। अगर आप समझते हैं कि मैंने इतना बड़ा अपराध किया है तो अपराधी को क्यों माफ किया जा रहा है?
मोदी ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री हूं, क्या सिर्फ इसलिए मुझे माफ कर दिया जाना चाहिए। यदि मैं दोषी हूं तो मुझे सबसे बड़ी सजा दी जाए। ताकि दुनिया जान जाए कि अपराध करने वाले राजनेताओं पर भी कोई नरमी नहीं होती। इससे पहले भी मोदी ने 'नई दुनिया' नामक उर्दू अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अगर वे गुजरात दंगों के दोषी हैं तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाए। कुपोषण के मसले पर मोदी ने कहा कि मौजूदा समय में सुंदरता के लिए सेहत से समझौता हो रहा है और नई पीढ़ी पौष्टिक चीजों से परहेज कर रही है। नरेंद्र मोदी की राय में मिडिल क्लास घरों की लड़कियां खूबसूरती के लिए सेहत से दूर भाग रही हैं।












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