लखनऊ में पत्रकारों पर हमला, अराजकता का सबूत: भाजपा

मुख्यमंत्री जी ने विश्व विद्यालयों एवं कालेजो के छात्रसंघ चुनावों को लिंगदोह आयोग के निर्णयों के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू करने का आदेश दिया है। इस क्रम में यदि पत्रकार वस्तुस्थिति की जानकारी एकत्र करें तो उन पर जानलेवा हमला किया जाए। इस प्रकार के अपराधी तत्व पूरी तरह निश्चिंत है और क्यों न हो जब उन्हे शासन सत्ता का सर्मथन हासिल है। कुछ दिनों पूर्व अलविदा की नमाज के बाद जिस प्रकार अराजकता लखनऊ, कानपुर, वाराणसी आदि महानगरों में फैलाई गई और शासकदल के प्रभाव में प्रशासन मूक दर्शक बना रहा यह पूरे प्रदेश की जनता के सामने आ चुका है।
इस घटना की कवरेज करने गए पत्रकारों को भी पीटा गया, कैमरे और अन्य उपकरण तोड़े गए थे। इसी की अगली कड़ी विश्वविद्यालयों में पत्रकारों पर हमला है। पत्रकारिता की स्वतंत्रता लोकतंत्र को मजबूत करने, सरकार और समाज को चेताने और जगाने में कितनी महत्वपूर्ण है। भाजपा समाचार पत्रों, पत्रकारिता की पूर्ण और बिना शर्त कार्य करने के अधिकार की हामी है और इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केन्द्र की यूपीए सरकार जिस तरह कैग जैसी संविधानिक संस्थओं पर हमलावार हो रही है, संविधान को लगातार अपने कृत्यों और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कमजोर कर रही है उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा एवं पत्रकारिता को दबाने का और अपने राजनैतिक हित साधन के लिए उपकरण बनाने के प्रयास की भाजपा घोर निंदा करती है। सरकार से मांग है कि इस प्रकार पत्रकारों पर हो रहे हमले को मात्र कानून-व्यवस्था का मामला नही समझा जाएं।












Click it and Unblock the Notifications