गूगल और फेसबुक ने माना, दहशत के पीछे पाकिस्तान की साइबर आर्मी

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे घटना क्रम के पीछे पाकिस्तान की साइबर आर्मी है। वो साइबर आर्मी जिसने असम में हुए जातिय हिंसा को जातिय दुश्मनी के तौर पर लिया और फिर उसे इंटरनेट के जरिये पूरे देश में अफवाह के तौर पर फैला दिया। पाकिस्तान की इस साइबर आर्मी ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर झूठी और पुरानी तस्वीरें डालकर धमकी भरे एसएमएस और पुरानी तस्वीरों वाले एमएमएस के जरिए सांप्रदायिक रंग दे दिया। इस एसएमएस और एमएमएस ने अपना काम बराबर किया और एक वर्ग विशेष के अंदर दूसरे वर्ग विशेष का खौफ भर दिया। खौफ ये कि असम की हिंसा का जवाब दूसरे राज्यों में दिया जाएगा। अफवाह ये कि दूसरे राज्यों में नॉर्थ ईस्ट के लोगों को निशाने पर लिया जाएगा। नॉर्थ ईस्ट के लोगों पर हमले किए जाएंगे जिससे 5 लाख से भी ज्यादा लोग इस असुरक्षा के चलते अपनी पढ़ाई-लिखाई और नौकरियां छोड़ अपने घर लौट गए।
खैर ऐसे में भारत सरकार ने ऐसी साइटों की पहचान कर लगभग 254 साइट्स को बंद कर दिया है। फेसबुक और यूट्यूब ने भी ऐसे लोगों के बारे में जानकारी जुटाने में मदद की है, पर ट्विटर ने सरकार का सहयोग करने से मना कर दिया है, जिससे नाराज भारत सरकार ट्विटर के खिलाफ कड़े कदम उठा सकती है। टेलीकॉम सेक्रेटरी आर चन्द्रशेखर ने कहा कि सरकार का सहयोग न करने वाली साइटों के खिलाफ कानूनी और कड़े कदम उठाये जायेंगे। सुरक्षा के मद्देनज़र पुणे, कोयंबटूर और बैंगलौर से इन संदेशों को फैलाने वाले कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।












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