1500 रुपए प्रति किलो बिक रही हिल्सा मछली

हिल्सा का क्या जलवा है कि हम इसी से समझ सकते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बांग्लादेश के दौरे के समय कहा था कि वे तो शाकाहारी हैं लेकिन हिल्सा के लिए वे मांसाहारी बन सकते हैं। यह बांग्लादेश का राष्ट्रीय मछली है । बांग्ला देश से चमचमाती हिल्सा मछलियां फिलहाल नहीं आ रही है। कुछ समय के लिए बांग्लादेश ने पाबंदी लगा दी है। दो साल पहले थोक बाजार में इसकी कीमती प्रति किलो 400 रूपये थी। पिछले साल इसकी कीमत 700 रुपये थी।
अब यह 1500 रुपये किलो है। पिछले दो साल से बांग्लादेश में अच्छी बारिश के कारण नदी से अच्छी मात्रा में हिल्सा मछली मिल रही थी। इस साल मानसून ने धोखा दिया है। इस बार गंगा ( हुगली) नदी और नर्मदा में भी हिल्सा कम हैं। बंगालियों के भोजन में यह मछली पहली पसंद है। हर कोई जानता है बंगाली परिवारों के भोजन में इलिश ठाट बाट का प्रतीक माना जाता है। इस बार हालात अलग हैं। बंगाल में हिल्सा के लिए हाहाकार मच गया है। आम आदमी हिल्सा खाने की बात सोच भी नहीं पा रहा है।
मानसून के कम रहने के कारण देश में मछलियों के प्रजनन पर खराब असर पड़ा है। इसे यों समझ सकते हैं गंगा नदी से इस साल 20 हजार टन से भी कम मछली पकड़ी गई है, जबकि पिछले साल का आंकड़ा लगभग 60 हजार टन था। देश विभाजन के साथ पद्मा नदी पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश) के हिस्से में चली गई और यहां इस नदी की हिल्सा सामान्य बंगाली भद्रजनों की रसोई से गायब हो गई थी। लेकिन, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रयास से पद्मा नदी की हिल्सा देश को मिलने लगी। है। वैसे ममता को खुद हिल्सा मछली बेहद पसंद है।
हिल्सा, प्रजनन के दिनों में समुद्र से नदियों में आती है। दशक पहले जब गंगा की यह दुर्गति नहीं हुई थी, हिल्सा बंगाल की खाड़ी से निकल कर सुंदरवन डेल्टा होते एक हजार किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए इलाहाबाद तक पहुंच जाती थी। अब हिल्सा यूपी और बिहार की बात तो छोड़िए बंगाल के कुछ हिस्सों तक सिमट कर रह गई है। वह इससे आगे नहीं जाती। जाहिर है इसकी वजह प्रदूषण है। हिल्सा की कीमत में तभी कमी आएगी जब बांग्लादेश हिल्सा की खेप शुरू करे।












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