अन्ना पार्टी बनी तो टूटेंगे भाजपा के खंभे

Team Anna in politics is big threat for BJP
दिल्ली (ब्यूरो)। डेढ़ साल पहले जब सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने जनलोकपाल के मुद्दे पर पहली बार जंतर मंतर पर धरना दिया तो सभी राजनीतिक दलों ने सोचा कि अन्ना एक अमेरिकी प्रेशर ग्रुप की तरह काम करेंगे, पर गुरुवार की शाम उनकी राजनीतिक दल बनाने की मंशा और अवाम से रायशुमारी ने सभी दलों की सांसें रोक दी हैं। हालांकि कांग्रेस इससे काफी खुश पर है पर मुख्य विपक्षी भाजपा की नींद गायब हो गई है। माना जा रहा है कि यदि जनता की रायशुमारी के बाद अन्ना ने पार्टी का गठन किया तो सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही होगा। वहीं योगगुरु बाबा रामदेव का खेमा भी अन्ना के इस प्रस्ताव पर सकते में है।

अन्ना का आंदोलन अब सड़क से सदन की ओर बढ़ चला है। अब वह दबाव समूह की कार्यप्रणाली को छोड़कर राजनीतिक दल की हैसियत से सदन में पहुंचेगा। हालांकि यह कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी कि अन्ना की टीम सदन में पहुंचेगी कि नहीं पर सियासी समीकरणों पर तीखी नजर बनाने वाले विशेषज्ञों ने वनइंडिया से कहा कि भले ही वे सदन में जाएं या न जाएं पर वे कई दलों का राजनीतिक समीकरण जरूर बिगाड़ देंगे जिसमें भाजपा पहले नंबर पर होगी। इसलिए इस बात से भाजपा अंदर ही अंदर बेचैन हो उठी है भले ही वह इस बात से इंकार कर रही है कि अन्ना की पार्टी से उसे कोई खतरा नहीं है।

बताया जा रहा है कि शहरी युवा वर्ग ही भाजपा की धड़कन है औऱ यही अन्ना के आंदोलन के ताकतवर खंभे थे। यानी भाजपा के खूटे उखड़ने वाले हैं। हालांकि भाजपा भी अन्ना दल के गठन पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करने लगी है और कहने लगी है कि जिस प्रकार से टीम अन्ना ने एसएमएस के जरिये जनता से रायशुमारी की गुजारिश की है यह ठीक नहीं है क्योंकि देश की साठ फीसदी आबादी गरीब है और उनके पास मोबाइल नहीं है। पार्टी ने परोक्ष रूप से जनता को यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस का विकल्प भाजपा ही है।

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, देश में 61 से ज्यादा राजनीतिक दल हैं जिनमें सात राष्ट्रीय हैं। राजनीतिक दल बनाना लोकतांत्रिक अधिकार है। बहरहाल यह भी सच्चाई है कि देश में साठ फीसदी आबादी गरीब है, जिसके पास एमएमएस की सुविधा नहीं है। यानी भाजपा ने संकेत संकेत दिया कि टीम अन्ना अभी उन गरीबों को नहीं जोड़ पाई है जो देश की असली ताकत है। शाहनवाज ने कहा, जनसंघ व भाजपा ने उस वक्त आवाज उठाई थी जब कांग्रेस के खिलाफ किसी का अस्तित्व नहीं था।

टीम अन्ना पर परोक्ष टिप्पणी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक दल बनाने की मंशा ने भाजपा के अंदर परेशानी बढ़ा दी है। पिछले आंदोलन में भाजपा ने एक कदम आगे बढ़कर अन्ना और उनकी टीम का सहयोग किया था। जाहिर तौर पर पार्टी कांग्रेस सरकार के खिलाफ उभरे आंदोलन में अपने लिए बड़ा अवसर देख रही थी, लेकिन बाद के दिनों में यह अहसास होने लगा था कि जनता की नजरों में कहीं टीम अन्ना ही मुख्य विपक्ष की भूमिका न ले जाए। भाजपा के साथ ही साथ अन्ना के इस फैसले से रामदेव खेमा भी सकते में हैं। क्योंकि यह फैसला लेने से पहले उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया इसलिए अन्ना के चुनावी अभियान पर रामदेव आज कोई बड़ी उद्घोषणा कर सकते हैं।

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