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नये हिस्‍सों में फैली असम दंगे की आग, 41 की मौत

police
गुवाहाटी। देश के पूर्वोत्तर हिस्से असम में हालात बद से बदतर होते जा रहे है। स्थानीय बोडो और बहार मुख्यतः बांग्लादेश से आकर बसे मुसलामानों के बीच छिड़ी हिंसा की आग ने दो और जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है जिसके चलते पुलिस ने अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।

असम में जारी इस हिंसा से राज्य के चार जिले चिरांग,धुबरी, बोंगई, कोकराझार और उनके अंतर्गत आने वाले कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पांच दिनों से चल रही हिंसा ने अब तक41 लोगों की जान ले ली है साथ ही इस हिंसा के चलते 400 गावों के लगभग 2 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि बुधवार को चिरांग से पांच शव और कोकराझाड़ से चार शव बरामद किए गए। कोकराझार में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया है। बीती रात दंगाइयों ने जिले के पांच गांवों में घरों को आग लगा दी।

सूत्रों से मिली जानकारी के औंसार कोकराझार जिले में 48 घंटे से ठप रेल यातायात आंशिक तौर पर बहाल हो गया। वहीं असम में फैली इस हिंसा ने राजनीतिक पार्टियों को भी एक नया मुद्दा दे दिया है जिसको राजनेताओं ने भुनाना शुरू भी कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी एवं मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) ने केंद्र एवं राज्य सरकार को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी कड़ी आलोचना की। सेना द्वारा बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए लगातार तनावग्रस्त इलाकों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है। पुलिस ने दावा किया कि कोकराझार एवं धुबरी जिलों में स्थिति में सुधार हुआ है।

आखिर क्यों हुआ ये टकराव

आपको बताते चलें की असम में ये बवाल तब शुरू हुआ जब कोकराझार में मुस्लिम समुदाय के दो छात्र नेताओं पर अज्ञात लोगों ने गोली चलाई थी। जवाबी हमले में शुक्रवार को बोडो लिबरेशन टाइगर्स संगठन के चार पूर्व सदस्य मारे गए थे जिसके बाद वहां फैली हिंसा ने बहुत ही विकराल रूप ले लिया और पूरे असम को अपनी चपेट में ले लिया है।

बताया जा रहा है कि बोडो समुदाय का गुस्सा इस वजह से भी ज्यादा भड़का है कि गैर-बोडो उन गांवों को बोडो क्षेत्रीय परिषद के दायरे से बाहर करने की मांग कर रहे हैं, जिनमें बोडो आबादी आधी से कम है। असम में जातीय हिंसा भड़कने से बनी परिस्थिति को खतरे की घंटी बताते हुए बीजेपी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा और उन पर हालात को लेकर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया है।

दंगे में बांग्लादेश का रोल

केंद्रीय गृह सचिव राज कुमार सिंह ने बांग्लादेश से लगने वाली सीमा के नजदीक हो रही हिंसा में सीमापार से किसी मदद से इनकार किया है। सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर सील कर दिया गए हैं ।साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ,'अभी तक इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं कि असम में हो रही हिंसा में बांग्लादेश का हाथ है।' उधर, आईजी जेएन चौधरी ने कोकराझाड़ और उसके इर्द-गिर्द हो रही हिंसा को सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह जातीय हिंसा है, जिसमें जातीय गुट शामिल हैं और इन दंगों में किसी भी बाहरी तत्त्व का कोई हाथ नहीं है।

असम के रूप में भाजपा को मिला नया मुद्दा

असम में फैली अशांति और लगातार हो रही मौतों पर भाजपा की तरफ से प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गयी है भाजपा नेता अनंत कुमार ने कहा है कि , प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संसद में असम का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह असम में बढ़ती हिंसा पर और वहां बाढ़ के हालात पर मूकदर्शक बने हुए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीजेपी कोर समूह की बुधवार शाम पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के घर पर हुई बैठक में भी असम के हालात और वहां हो रही हिंसा पर पार्टी नेताओं ने गंभीर चिंता जताई गई सूत्रों कि माने तो पार्टी आलाकमान के घर पर बस इसी बात कि चर्चा थी की आखिर सरकार इस महत्त्वपूर्ण विषय पर क्यों चुप्पी साधे हुए है ? क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही सरकार द्वारा असम में रह रहे लोगों को रहत दी जायगी।

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