अन्‍ना से सवाल- किसी नेता के खिलाफ एफआईआर क्‍यों नही करायी?

पिछले साल अगस्‍त में अन्‍ना हजारे ने जन लोकपाल बिल के लिये आंदोलन छेड़ा। देश भर में उनके आंदोलन को समर्थन मिला, लेकिन सरकार उनसे दो हाथ आगे निकली। और राजनीति के दांवपेंच लगाते हुए विधेयक को ठंडे बस्‍ते में डाल दिया। एक साल बाद फिर से अन्‍ना की अलख जगी है और दिल्‍ली का जंतर-मंतर फिर से तिरंगे के रंग से रंग गया है। चारों तरफ महात्‍मा गांधी के भजन बज रहे हैं और टीम अन्‍ना के सदस्‍य अनशन पर बैठ गये हैं।

सोमवार को अनशन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम और कपिल सिब्‍बल पर आरोप लगाये गये-

हमारा सवाल यह है कि अगर टीम अन्‍ना के पास मंत्रियों के खिलाफ ठोस सबूत हैं, तो अब तक उसने किसी के भी खिलाफ एफआईआर क्‍यों नहीं करवायी।

अगर बेंगलूरु में अन्‍ना के एक दिन के कार्यक्रम के बजट को आधार बनाते हुए आंकलन किया जाये तो जंतर-मंतर पर एक दिन में डेढ़ लाख से ज्‍यादा का खर्च आ रहा है। यह वो पैसा है, जो लोगों ने स्‍वेच्‍छा से दिया है। क्‍या इस पैसे से अनशन करना ही जरूरी है?

अन्‍ना और उनकी टीम ने मंच पर खड़े होकर कहा कि हमारे देश को भ्रष्‍ट राष्‍ट्रपति मिला है। देखते ही देखते तमाम न्‍यूज वेबसाइटों और चैनलों पर हेडलाइनें चल गईं कि "देश को मिला भ्रष्‍ट राष्‍ट्रपति", मीडिया वाले ऐसी हेडलाइनें चलाने के बाद यह कहकर पल्‍ला झाड़ लेते हैं कि ये हम नहीं टीम अन्‍ना कह रही है। अरे भाई टीम अन्‍ना कोई भगवान थोड़ी ही है, जो वो कह दे कि प्रणब द भ्रष्‍ट हैं, तो वो भ्रष्‍ट हो जायेंगे।

हम यहां सीधा सवाल कर रहे हैं टीम अन्‍ना से कि अगर उनके पास प्रणब दा के खिलाफ एक भी सबूत है, तो वो उसे तब क्‍यों नहीं पेश किया जब सोनिया गांधी ने उन्‍हें राष्‍ट्रपति चुनाव के लिये उम्‍मीदवार घोषित किया था।

टीम अन्‍ना के सदस्‍य सुबह से मंच पर खड़े होकर चिल्‍ला रहे हैं कि वो 15 मंत्रियों के खिलाफ एसआईटी की जांच चाहते हैं। जांच तो तब होगी, जब कोई केस दर्ज होगा। आपने अभी तक अगर किसी भी मंत्री के खिलाफ एफआईआर लिखवायी हो, तब एसआईटी की मांग करें, तो जायज होगा, लेकिन बिना मामला दर्ज कराये कैसे जांच हो सकती है। पुलिस तो क्‍या तब तक कोर्ट भी हस्‍तक्षेप नहीं कर सकता।

हम यह नहीं कह रहे हैं कि टीम अन्‍ना फिजूल की मांग कर रही है। उनकी मांग बिलकुल जायज है और हम उसका समर्थन करते हैं, लेकिन उनका तरीका कुछ हद तक सही नहीं है। क्‍योंकि अगर हर मांग को मनवाने के लिये अनशन और धरना प्रदर्शन ही एक मात्र रास्‍ता होता, तो हमारा देश ट्रैफिक जाम के मामले में नंबर-1 पर होता।

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