10 में से 4 इंजीनियरों को नहीं आती है अंग्रेजी

4 out of 10 engineers can't write correct English says a survey
दिल्ली। भारत में प्रतियोगी परीक्षा दे कर युवक इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर इंजीनियर तो बन जाते हैं मगर उन्हें अंग्रेजी नहीं आती या यूं भी कहा जा सकता है भारतीय इंजीनियरों की पकड़ अंग्रेजी पर जरा ढीली है। जी हाँ ये खुलासा हुआ है भारतीय इंजीनियरों पर किये गए एक सर्वे में। सर्वे में कहा गया है कि देश में हर 10 में से 4 इंजीनियर अंग्रेजी नहीं समझ सकते। सर्वे के मुताबिक, वे न तो रोजमर्रा की बातचीत अंग्रेजी में कर सकते हैं और न ही सही वाक्य लिख सकते हैं।

रोजगार का मूल्यांकन करने वाली कंपनी एसपायरिंग माइंड्स द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार इंजीनियरों के अंग्रेजी ज्ञान का स्तर काफी खराब है। सर्वे के मुताबिक देश के 25 फीसदी इंजीनियर ऐसे हैं जिन्हें अंग्रेजी की समझ नहीं है, जबकि इंजीनियरिंग स्कूलों के पाठ्यक्रम को समझने के लिए यह काफी जरूरी है। कंपनी ने सर्वे में देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित 250 इंजीनियरिंग कॉलेजों के 55,000 छात्रों को शामिल किया है।

सर्वे के अनुसार देश के करीब 36 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ऑफिशियल रिपोर्ट पढ़ने में भी सक्षम नहीं है। ऐसे में वे काफी सरल भाषा में सूचना होने के बावजूद उसे अच्छी तरह समझ नहीं पाते हैं। सर्वे का निष्कर्ष उस तथ्य का ठीक विपरीत है कि साक्षात्कार के लिए अंग्रेजी की समझ काफी जरूरी है और इसे प्रतिभागी के एक प्रमुख गुण के रूप में देखा जाता है।

जिन लोगों पर सर्वे किया गया उनमें से 57 फीसदी ऐसे थे जो व्याकरण की दृष्टि से सही अंग्रेजी लिख सके और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले 48 फीसदी छात्र ऐसे मिले जो अंग्रेजी के शब्दों के समझने में सक्षम थे। सर्वे के अनुसार अंग्रेजी की अच्छी समझ नहीं होने के बावजूद इंजीनियरिंग करने वालों की तुलना में रोजगार देने वाली कंपनियां भी अंग्रेजी की अच्छी समझ रखने वालों का तरजीह देती हैं। ऐसा देखा गया है कि अंग्रेजी की समझ रखने वाले इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स इस भाषा में कमजोर छात्रों की तुलना में 30-50 फीसदी अधिक सैलरी पाते हैं।

एसपायरिंग माइंड्स के निदेशक वरुण अग्रवाल ने इस विषय पर हैरानी जताते हुए कहा कि उनकी कंपनी द्वारा किया गया यह सर्वे इंजीनियरों पर अब तक किए गए सर्वे में सबसे व्यापक है। सर्वे में कहा गया है कि इस स्थिति में सुधार लाने के लिए स्कूलों की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। इस कमी को पूरा करने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों के पहले समेस्टर में ब्रिज कोर्स चलाने की जरूरत है।

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