एक रुपये की कीमत तुम क्‍या जानो चिदंबरम बाबू?

P Chidambaram
आज हम बात कर रहे हैं एक रुपये की जिसकी कीमत देश के गृहमंत्री को नहीं पता है। उन्‍होंने पहले जख्‍म दिया, जख्‍म पर नमक लगाया और फिर नमक लगाने के इस फैसले को सही भी ठहरा दिया। यहां बात हो रही है पी चिदंबरम की और उनके बेबाक बयानो की। पहले चिदंबरम ने यह कहा कि मिडिल क्‍लास के लोग सिर्फ दिखावे के लिये महंगाई का विरोध करते हैं। वह हर रोज 20 रुपये की आईसक्रिम खा सकते हैं मगर दाल चावल में 1 रुपये की बढोत्‍तरी होती है तो फालतू की हाय तौबा मचाई जाती है। जब बयान पर हंगामा मचा तो उन्‍हें सफाई देनी पड़ी। मगर चिदंबरम की इस सफाई से मिडिल क्‍लास लोगों का दर्द कम नहीं हुआ। आम आदमी अब भी यही कह रहा है कि एक रुपये की कीमत तुम क्‍या जानो चिदंबरम बाबू?

आगे की बात करने से पहले आपको चिदंबरम के उस बयान के बारे में बता दें जिसमें उन्‍ह‍ोंने आईसक्रिम को माध्‍यम बनाकर गरीबी का मजाक उड़ाया था। बैंगलोर में चिदंबरम ने एक बैठक में कहा कि मिडिल क्‍लास लोग 15 रुपये पानी की बोतल पर खर्च कर सकते हैं मगर चावल दाल में प्रति किलो एक रुपये की बढ़ोत्‍तरी उनसे बर्दाशत नहीं होती। इतना ही नहीं चिदंबरम ने कहा कि आम आदमी 20 रुपये खर्च कर आईसक्रिम का एक कोन खा सकता है मगर दाल चावल की कीमत में एक रुपये बढ़ जाये तो हंगामा खड़ा कर देता है।

अब तो आप जान ही गये होंगे की घटिया दलील देकर चिंदबरम महंगाई पर सरकार का बचाव कर रहे हैं। सवाल खड़े कर रहे हैं जब आम आदमी आईसक्रिम और पानी की बोतल पर 20 रुपये खर्च कर सकता है तो गेहूं और चावल पर क्‍यों नहीं? गृहमंत्री के बयान पर बवाल मचा तो मंत्रालय की तरफ से सफाई पेश की गई और कहा गया कि जो सच है गृहमंत्री ने वही कहा है। उन्‍होंने किसी का मजाक नहीं उड़ाया है। मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि अगर सभी बातों पर सोचा जाये तो चिदंबरम ने जो कहा है वह सच है।

जारी बयान में कहा गया कि चिदंबरम ने बोलते समय हम शब्‍द का प्रयोग किया है। उन्‍होंने ऐसा नहीं कहा कि वो लोग कीमत बढ़ोत्‍तरी पर क्‍यों हल्‍ला मचाते हैं। गृहमंत्री ने जो कहा है मीडिया में उन बातों का गलत मतलब निकाल का दिखाया जा रहा है। भले ही चिदंबरम हम शब्‍द की बात की दलील दे रहे हैं, भले ही उनकी पार्टी मीडिया पर गलत मतलब निकालने का दोष मढ़ रही है मगर सरकार के सहयोगियों को चिदंबरम का यह बयान रास नहीं आ रहा है।

एनसीपी नेजा डीपी त्रिपाठी ने कहा कि अगर सभी लोग चिदंबरम जैसे संपन्‍न होते तो एक बार सोचा जाता मगर जबकि ऐसा नहीं है तो चिदंबरम का यह बयान शोभा नहीं देता है। इतना ही नहीं सरकार को समर्थन देने वाली आरजेडी और समाजवादी पार्टी को भी चिदंबरम का यह बयान नागवार गुजरा है। समाजवादी पार्टी के नेता शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि चिदंबरम का बयान बिल्‍कुल वैसा ही है जैसा फ्रांस की क्विन मैरी ने फ्रांस की क्रांति से पहले दिया था। आपको बता दें कि क्विन मैरी ने कहा था कि जिन गरीबों के पास रोटी नहीं है वो केक खाएं। मैरी का यह बयान पूरे देश में इंकलाब बन गया था। सिद्दीकी ने कहा कि इस बार भी कहीं ऐसा ना हो कि चिदंबरम का बयान पूरे देश में इंकलाब की स्थिति पैदा कर दे या फिर किसी बड़े हंगामे की बुनियाद खड़ी कर दे।

चिदंबरम के इस बयान पर भाजपा ने भी मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता मुख्‍तार अब्‍बास नकवी का कहना है कि सरकार ने गरीबी को आईसक्रिम और पानी की बोतल में जीन की तरह बंद कर दिया है। कहते हैं दिल की बात जुबान पर आ ही जाती है। चिदंबरम ने जो कुछ भी कहा या जिससे भी तुलना की उसे कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता। भले ही अब वो ये कह रहें हो कि उनकी बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और उनके कहने का मतलब मजाक उड़ाना नहीं था। मगर चिदंबरम साहब को कौन समझाए कि आम आदमी हर रोज तो आईसक्रिम नहीं खाता मगर अनाज की जरुरत उसे रोज पड़ती है।

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