अब तक 50 लाख टेस्ट ट्यूब बेबी ले चुके जन्म

दुनिया का पहले टेस्ट ट्यूब बेबी 'लुइस ब्राउन' जुलाई 1978 में ब्रिटेन में जन्मा था। इस सम्मेलन में बताया गया कि बच्चा पैदा करने में असमर्थ लोगों को संतान सुख दिलाने के लिए टेस्ट ट्यूब तकनीकी ने जबर्दस्त कामयाबी हासिल की है। इस तकनीकी में पहले की अपेक्षा काफी सुधार भी किया गया है। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रीप्रोडक्शन एंड(एंब्रोयोलाजी) द्वारा आंकड़ो की जानकारी दी गयी है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व में हर साल 3 लाख पचास हजार बच्चे इस प्रक्रिया से जन्म ले रहे है। यह आकड़ा हर वर्ष जन्म लेने वाले बच्चों का 0.3 फीसदी है। आईवीएफ और आईसीएसआई तकनीकी की सहायता से बच्चों को जन्म दिया जाता है। आईवीएफ तकनीकी में अंडाणु और शुक्राणु दोनों को निषेचित किया जाता है। आईसीएसआई तकनीक के द्वारा शुक्राणु का इंजेक्शन अंडाणुओं में सीधे निषेचन कराया जाता है।
समाज का एक बड़ा वर्ग इस तकनीकी के समर्थन में है तो एक वर्ग इसके विरोध में भी खड़ा है। कुछ लोग अप्राकृतिक होने की वजह से इसका विरोध करने में लगे हुए है। एक वर्ग इस तकनीकी प्रक्रिया द्वारा बच्चा पैदा करने के तरीक को सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ मानता है। पहले की अपेक्षा इस तकनीकी में सुधार भी किया गया है।












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