कांग्रेस के द्वार खड़ा नोट खाने वाला बसपाई हाथी

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी की प्रस्तावक बनकर मायावती ने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस के साथ है। हालांकि प्रस्ताव बनने का आमंत्रण कांग्रेस की ओर से ही दिया गया था जिसे माया ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
मौका परस्त राजनीति करने में माहिर कांग्रेस ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को राष्टï्रपति बनाने के लिए बहुजन समाज पार्टी से समर्थन ले लिया। जबकि कुछ दिन पूर्व तक कांग्रेस यह बयान देती फिर रही थी कि उसका बसपा व बसपा सुप्रीमों मायावती से कोई मेल नहीं। यह बयान बाजी उत्तर प्रदेश विधान चुनाव के दौरान चरम पर थी दोनों ही दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे।
जनता को भी ऐसा लगा कि कांग्रेस और बसपा कभी एक नहीं होंगे लेकिन राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस को बसपा सुप्रीमों को समर्थन लिए बुलाना साबित करता है कि कांग्रेस अपनी साख बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है। मायावती के पास भी कांगे्रस के साथ जाने की मजबूरी है क्योंकि यदि वह ऐसा नहीं करती हैं तो उनके सामने दो ही विकल्प बचते हैं या तो वह राष्ट्रपति चुनाव में मतदान न करें या फिर वह भाजपा के उम्मीदवार का साथ दें। माया को दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह नजर आ रहा है कि यूपी के एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई के शिकंजे से सिर्फ कांग्रेस ही बचा सकती है।
ज्ञात हो कि मिशन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार सीबीआई को ऐसे भी सबूत मिले जिससे यह पता चलता है कि मिशन घोटाले में जो कुछ भी हुआ वह मायावती की जानकारी में था बावजूद इसे रोकने का प्रयास नहीं किया गया। अब यदि मायावती को सीबीआई से बचना है तो उन्हें कांग्रेस का साथ देना ही होगा।












Click it and Unblock the Notifications