हाई-टेक होगा काशी विश्वनाथ मंदिर

देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में शामिल बाबा विश्वनाथ मंदिर से देश ही नही विदेशियों की भी आस्था जुड़ी है। यहां लाखों की तादाद में धार्मिक सैलानी आते हैं। इसक दौरान यहां की पूजा-अर्चना के लिए लंबी लाइनें लगती हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, ल बी कतारों से तो मुक्ति मिलेगी ही साथ ही श्रद्वालुओं को समय से बाबा के दर्शन भी मिल सकेंगे। दर्शन के लिए अब इंटरनेट के माध्यम से बुङ्क्षकग होगी।
धर्मार्थ कार्य विभाग के तहत आने वाले ट्रस्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। वहीं धर्मार्थ कार्य एवं कृषि मंत्री आनंद ङ्क्षसह ने इसमें तेजी लाने के निर्देश दिये और उन्होंने बताया सिर्फ श्रद्वालुओं की बुकिंग ही इन्टरनेट के माध्यम से ही नहीं होगी बल्कि एक विशेष मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है जिसमें मंदिर के दीर्घकालीन विकास की योजना होगी।
वहीं बाबा विश्वनाथ मंदिर में प्रसाद वितरण की भी नई व्यवस्था की जा रही है। भक्तों को धूप, बरसात से बचाने के लिए मंदिर परिसर में फाइबर ग्लास से छत बनायी जाएगी। काशी विश्वनाथ मंदिर अति प्राचीन मंदिरों में है। पौराणिक अवधारणा है कि इस नगरी को भगवान शिव ने स्वयं आकर बसाया था और ल बे समय तक भगवान गणेश ने भी यहां निवास किया है। इसी कारण दुनिया भर में काशी का सबसे अधिक धार्मिक महत्व है।
भगवान शिव के इस मंदिर के गुंबद सोने के बने हैं। इसी कारण इस मंदिर की तुलना अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से की जाती है। काशी विश्वनाथ मंदिर का देशी ही नहीं विदेशी आस्था का भी प्रतीक है। यही कारण है कि आज भी यहां दान के रूप में विदेशी मुद्राएं आती है। इतिहासकार भी इस बात की पुष्टिï करते हैं कि प्राचीन काल में राजा-महाराजाओं के समय की स्वर्ण मुद्राएं आज भी मंदिर में मौजूद हैं।












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