कांग्रेस में राहुल होंगे सोनिया के बाद दूसरे नंबर के नेता

वैसे कुछ कांग्रेसी अभी भी उन्हें सरकार में लाने की वकालत कर रहे हैं पर सूत्र बता रहे हैं कि वे संगठन में ही रहना चाहते हैं। इसीलिए उनके लिए सोनिया गांधी के बाद की कुर्सी दी जा सकती है। हालांकि यह चर्चा पिछले साल से ही चल रही है जब सोनिया गांधी इलाज के लिए अमेरिका जा रही थी। उस समय भी मीडिया और सियासी गलियारे में चर्चा थी कि राहुल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने कृष्णा की उस मांग को ठुकरा दी है जिसमें उन्होंने उनसे सरकार में शामिल होने की बात कही थी। राहुल के इस इंकार के बाद अब दस जनपथ राहुल को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। राहुल को कार्यकारी अध्यक्ष या फिर पार्टी उपाध्यक्ष के पद पर बैठाया जा सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पार्टी कार्यों के प्रति सक्रियता में कमी के कारण भी इस पद के लिए राहुल को उपयुक्त माना जा रहा है क्योंकि इधर राहुल ने अपने कामों को अनौपचारिक रूप से बड़ा कर लिया है। वहीं सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कई बार राहुल को मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने नहीं स्वीकारा।
राहुल का मानना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में संगठन की मजबूती बेहद जरूरी है। पार्टी के भीतर भी गत कुछ महीनों से राहुल को देश के भावी नेता के रूप में पेश किए जाने जरूरत महसूस की जा रही है। लोस चुनाव नजदीक आते ही सरकार की तुलना में संगठन अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा, इसलिए राहुल को पार्टी की कमान सौंपकर जनता के बीच उनके नेतृत्व और दावेदारी को मजबूत किया जा सकता है।
मंत्रिमंडल में होगा बदलाव
प्रणब मुखर्जी के रायसिना हिल्स की ओर लगातार आगे बढ़ने औऱ भ्रष्टाचार के मसले पर वीरभद्र सिंह के इस्तीफ देने से मंत्रिमंडल में दो स्थान खाली हो गए हैं। इसलिए मंत्रिमंडल के साथ साथ कांग्रेस में भी फेरबदल होने की देर सबेर संभावना जताई जा रही है। कृष्णा के राग छेड़ने के बाद राहुल के सरकार में शामिल होने को लेकर आने वाले दिनों में और भी कई आवाजें बुलंद हो सकती हैं।












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