कुख्यात कैदियों को पांच साल तक नहीं मिलेगी पैरोल

No parole to dreaded criminals in Haryana
गुडग़ांव। हरियाणा की जेलों में बन्द कुख्यात कैदी पांच साल तक पैरोल पर जेल से बाहर नहीं जा सकेंगे। जल्द ही इस संबंध में नियमों में जरूरी बदलाव करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा। यह जानकारी हरियाणा के पुलिस महानिदेशक रंजीव सिंह दलाल ने गुडग़ांव में पुलिस आयुक्त भवन की आधारशिला रखने उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए दी। दलाल ने भोंडसी स्थित पुलिस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में श्रीराम पुलिस पब्लिक स्कूल के भवन की आधारशिला भी रखी।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए दलाल ने कहा कि कई बार जेलों में बन्द कैदी पैरोल पर बाहर जाकर अपराध करते हैं और फिर फरार हो जाते हैं। इन मामलों पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा प्रिजनर्स गुड कंडक्ट एक्ट में कुछ बदलाव करने की योजना है, जिसको लेकर गृह सचिव के साथ बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि योजना के अनुसार एक प्रस्ताव बनाकर एक्ट में बदलाव करने के सुझाव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे और प्रस्ताव के पास होने पर कोई भी कुख्यात कैदी पहले पांच साल तक जेल से पैरोल लेकर बाहर नहीं जा सकेगा।

दलाल ने कहा कि कई बार देखने में आता है कि जेल में बन्द किसी कैदी के परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाती है और उसे पैरोल पर जाने की इजाजत मिल जाती है। ऐसे मामलों में भी नियमों के बदलाव की योजना है। योजना के तहत बदलाव के बाद कैदी को पुलिस टीम के साथ जेल से बाहर ले जाया जाएगा और पुलिस टीम की निगरानी में ही उसे वापिस जेल लाया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि उत्तर भारत के राज्यों में पुलिस कमिश्ररेट की शुरूआत सबसे पहले हरियाणा में हुई थी। शहरों में बढ़ती आबादी और बड़े क्षेत्र को देखते हुए सरकार ने गुडग़ांव व फरीदाबाद में पुलिस कमिश्ररेट का गठन किया है। हरियाणा की तर्ज पर पंजाब, राजस्थान और उड़ीसा भी इस पद्धति को अपना रहे हैं।

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