30 साल बाद पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे सुरजीत

मीडिया से बातचीत करते हुए सुरजीत सिंह ने कहा कि अब वह कभी भी पाकिस्तान नहीं आयेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जेल में उन्हें किसी भी तरह की तकलीफ नहीं थी। सुरजीत ने कहा कि दोनों देशों के कैदियों को आजाद करना चाहिए क्योंकि मुल्क से दूर होने के बाद का गम असहनीय होता है। सुरजीत सिंह ने कहा कि वह जेल में अक्सर सरबजीत सिंह से मिला करते थे। सुरतीज सिंह ने कहा कि सरबजीत जेल में बिल्कुल ठीक है।
- भारतीय कैदी सुरजीत सिंह को भले ही गुरुवार सुबह पाकिस्तानी जेल से रिहाई मिल गई हो लेकिन जब वह वाघा सीमा पर पहुंचे तो उनके हाथों में हथकड़ी थी। उनकी हथकड़ी लोहे की एक जंजीर के जरिए पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी के बेल्ट से जुड़ी हुई थी।
- सुरजीत सिंह ने नम आंखों से कहा कि वह सबसे पहले अपने बच्चे को गला लगाना चाहते हैं। वहीं पाकिस्तान पर लग रहे गफलती के आरोप पर भी से भी सुरजीत ने पर्दा उठाया। सुरजीत सिंह ने कहा कि उर्दू में सुरजीत और सरबजीत को लिखावट में बहुत समानता है। तो हो सकता है इसमें कोई गलतफहमी हो गई हो।
सुरजीत के परिवार ने बताया कि 30 साल पहले एक दिन वह टहलने निकले और फिर वापस नहीं आए। परिवार वालों को ऐसा लगा कि उनके साथ कोई अनहोनी हो गयी है, वह इस दुनिया में नहीं रहे। वर्ष 2005 में पाकिस्तान जेल में एक भारतीय कैदी छूटकर आया।
उसने सुरजीत के परिवार वालों को उसके जेल में होने की सूचना दी गयी। वहीं दूसरी तरफ सुरजीत सिंह के वकील अवैस शेख ने संवाददाताओं से कहा कि भारतीय नागरिक को सैन्य शासक जिया उल हक के शासन के दौरान जासूसी के आरोपों में पाकिस्तानी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 1985 में पाकिस्तान सेना कानून के तहत सिंह को मृत्युदंड दिया गया था लेकिन वर्ष 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।












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