राष्ट्रपति चुनाव: एकजूटता कहीं नहीं फिर भी बिखराब से इंकार

यह राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद का चुनाव है जो आमसहमति से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रणव सबसे बेहतर उम्मीदवार है, इसलिए हम उनका समर्थन कर रहे हैं। राजग के घटक दलों की पहले भी राष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में अलग अलग राय रही है। 2007 में शिवसेना ने प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था जबकि इससे पहले अकाली दल ज्ञानी जैल सिंह का समर्थन कर चुका है। कांग्रेस महासचिव बी के हरिप्रसाद ने इस विषय में पूछे जाने पर कहा कि पार्टी पहले ही सभी राजनीतिक दलों से सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुने जाने का आग्रह कर चुकी है और इस दिशा में अभी भी प्रयास जारी हैं।
भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, कभी कभी असामान्य स्थिति सामने आती है जो इस बार राष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में देखने को मिली है। लेकिन यह क्षणिक घटना है। यह कोई लोकसभा चुनाव या सरकार बनाने के लिए होने वाला चुनाव नहीं है। उन्होंने कहा कि राजग में शिवसेना ने पिछले बार राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल को समर्थन दिया था और इस बार वाममोर्चा में भी अलग अलग विचार सामने आए हैं। इसका कोई दूरगामी प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर संप्रग के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का समर्थन करने का निर्णय किया गया है।
आज की स्थिति में प्रणव सबसे अधिक स्वीकार्य व्यक्ति हैं। करात ने कहा कि प्रणव को समर्थन देने का यह मतलब नहीं है कि हम कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं। माकपा संप्रग की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी। गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजग में उस समय दरार सामने आ गई जब भाजपा ने पीए संगमा की उम्मीदवारी का समर्थन करने का निर्णय किया दूसरी ओर गठबंधन के महत्वपूर्ण घटक जद यू और शिवसेना ने संप्रग के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी का साथ देने का फैसला किया।
सत्तारूढ संप्रग में भी कमोबेश यही स्थिति है जहां गठबंधन के एक अहम घटक राकांपा से इस्तीफा देकर पीए संगमा राष्ट्रपति पद के चुनाव में संप्रग के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी को चुनौती दे रहे हैं । संप्रग के एक महत्वपूर्ण सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने संप्रग के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी को समर्थन देने से इंकार करते हुए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को उम्मीदवार बनाने का निर्णय किया था। हालांकि कलाम राष्ट्रपति पद के चुनाव की दौड़ से हट गए। तृणमूल ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं किया है।
वाममोर्चा, सपा, बीजद, तेदेपा आदि के राष्ट्रपति चुनाव में अलग अलग रूख व्यक्त करने के कारण तीसरा मोर्चा बनने से पहले ही बिखर गया। सपा और बसपा ने संप्रग उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी को समर्थन देने का निर्णय किया है और वाममोर्चा में अलग अलग राय है। जारी भाषा दीपक राष्ट्रपति पद के चुनाव पर वाम दल बंटे नजर आ रहे हैं । माकपा और फारवर्ड ब्लाक ने जहां संप्रग उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के समर्थन का फैसला किया है वहीं भाकपा और आरएसपी ने मतदान में भाग नहीं लेना तय किया है।
तेदेपा ने संप्रग के उम्मीदवार प्रणव को समर्थन देने का संकेत दिया है। वहीं, नवीन पटनायक की बीजद और जयललिता की अन्नाद्रमुक ने पी ए संगमा को समर्थन देने का निर्णय किया है। इन घटनाक्रमों के बीच, संप्रग के राष्ट्रपति पद के उम्मीवार प्रणव मुखर्जी के लिए रायसीना हिल्स की राह आसान नजर आ रही है क्योंकि जिन दलों का समर्थन हासिल है उनके मतों का मूल्य 6 . 29 लाख है जो जीत के लिए अपेक्षित आंकडे से कहीं ज्यादा है।
तृणमूल के साथ नहीं देने की सूरत में संप्रग के पास 4.12 लाख मत मूल्य है। लेकिन सपा के 66688, बसपा के 45473, जदयू के 40737, शिवसेना के 18495 और जद-एस के 6138 मत मूल्यों की बदौलत प्रणव जीत के लिए अपेक्षित संख्या पांच लाख 49 हजार 442 से अधिक मत मूल्य हासिल कर लेंगे। दूसरी ओर मतभेद से पहले राजग के पास 3.04 लाख मत मूल्य था लेकिन जदयू और शिवसेना के अलग होने से यह घटकर 2.43 लाख रह गया है। यदि अन्नाद्रमुक और बीजद संगमा का साथ देते हैं तो अन्नाद्रमुक के 36920 और बीजद के 30125 मत मूल्य भी जुडेंगे तो संगमा 3.10 मत मूल्य हासिल कर सकेंगे।
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