अपना घर मामले में आठ पीडि़तों की जांच

ठीक से काम नहीं किया ता छीन ली आवाज
अपना घर रसोई में ठीक से काम न करने पर संचालिका ने बच्ची के सिर पर डंडा दे मारा। नतीजा 12 साल की लड़की गहरे सदमे के चलते गुमसुम हो गई। इसकी जानकारी लड़की की सहेली ने दी। रोहतक स्थित शेल्टर होम 'अपना घर' में रहने वाली बच्ची इस कदर सदमे में है कि उसने बोलना छोड़ दिया है। शेल्टर होम में उत्पीडऩ की कहानी बयां करती 12 साल की इस बच्ची की सहेली ने मामले की जांच करने गई वकीलों की चार सदस्यीय कमेटी को बताया कि रसोई में गलती करने पर शेल्टर होम की संचालिका जसवंती ने उसके सिर पर डंडा मारा था। तब से उसकी सहेली गुमसुम है, कुछ नहीं बोल रही। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में भी इस लड़की का हवाला देते हुए कहा कि लड़की भावविहीन है और किसी सवाल का कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है।
पैनल ने की आठ पीडि़तों की जांच
मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एडीजीपी कानून व्यवस्था एमएस मान मंगलवार को करीब 11 बजे सर्किट हाउस पहुंचे। आईजी आलोक मित्तल व कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक विकास धनखड़ ने उनकी अगुवाई की। इसके बाद एडीजीपी ने एसआईटी से जुड़े अधिकारियों की बैठक ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अब तक हुई जांच प्रक्रिया के बारे में जब एडीजी से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। इस मामले में पीडि़तों की चिकित्सा जांच शुरू हो गई है। सोमवार से शुरू हुई जांच प्रक्रिया में अब तक आठ पीडि़तों की जांच हुई है।
पीजीआई द्वारा गठित पैनल ने आठ पीडि़तों की जांच के बाद रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी है। पीजीआइएमएस में जांच कराने आने वाले पीडि़तों की किसी को भनक तक नहीं लगने दी जा रही। सोमवार से अब तक पैनल आठ लोगों की जांच कर चुका है। रोजाना की जाने वाली जांच रिपोर्ट को पैनल सील कर एमएस के हवाले करते हुए संबंधित जांच अधिकारी को सौंप रहा है। संस्थान के निचले स्तर से उच्च स्तर तक सारे मामले को पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जा रहा है। इस मामले में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता की बात सामने आने के बाद और केंद्र सरकार और राज्यपाल द्वारा रिपोर्ट मांगी गई है।
अफवाह है असरदार ओहदेदार के नाम
अपना घर प्रकरण में कहीं न कहीं लग रहा है कि इस पूरे खेल के खिलाड़ी बड़े नाम वाले और असरदार ओहदेदार हैं। वहीं हरियाणा पुलिस के महानिदेश रंजीव दलाल इसे कोरी अफवाह बता रहें हैंं। डीजीपी मंगलवार को पंचकूला में थे और जब उनसे इस बाबत सवाल किया गया कि अपना घर मामले में राजनीति व पुलिस से जुड़े कई नाम सामने आए हैं, जिन्हें दबाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा ऐसा कतई नहीं है, यह ऐसा मामला है जिसमें जांच लंबी चल सकती है और जब तक जांच पूरी नहीं होती तो कुछ भी कहा जा सकता। वैसे भी बड़े नाम सामने आने वाली बात सिर्फ अफवाह है। डीजीपी से जब पूछा गया कि इस मामले की जांच अब सीबीआई करेगी? तो उनका जवाब था कि राज्य पुलिस के पास भी काबिल ऑफिसर हैं। फिर भी सीबीआई मामले की जांच करेगी तो जरूरत पडऩे पर वे अपना पूरा सहयोग देंगे।
सीबीआई को प्रकरण में नए सिरे से जांच करनी होगी
मामले में बड़े नाम सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लग गया है। पुलिस को स्पष्ट निर्देश हैं कि बात मीडिया में लीक न हो। उधर राज्य पुलिस के मुखिया को अपने अधिकारियों की जांच पर भरोसा है, लेकिन दबाव अधिक होने के कारण जांच की दिशा के बारे में पुलिस खुलासा नहीं कर रही। अपना घर के माध्यम से आयोजित होने वाले समारोह में जो मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत करते थे। अब उनसे पूछताछ की तैयारी है। मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत करने वाले लोग भी जसवंती के क्रियाकलापों में भागीदार थे। डीजीपी दलाल के मुताबिक काफी समय पहले एनजीओ या समाज कल्याण के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं को काफी प्रमोट किया गया था। लेकिन इस प्रकरण के बाद एनजीओ का एक खतरनाक चेहरा सामने आया है। जहां तक एनजीओ रजिस्टर करने की बात है, तो इसके लिए अलग विभाग बना हुआ। पुलिस इसमें मदद कर सकती है।
अपना घर प्रकरण के लिए सरकार जिम्मेदार
हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) के अध्यक्ष एवं सांसद कुलदीप बिश्नोई ने कहा है कि रोहतक के अपना घर, गुडग़ांव के शेल्टर होम और यमुनानगर के बालकुंज समेत राज्य के अन्य क्षेत्रों में घृणित कृत्यों ने हर व्यक्ति को हिलाकर रख दिया है। इससे पूरे देश में राज्य की छवि धूमिल हुई है। इन संस्थाओं में पिछले लंबे समय से चल रही शर्मसार कर देने वाली घटनाओं के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। सांसद कुलदीप बिश्नोई ने मंगलवार को यहां कहा कि अपना घर की संचालक जसवंती को प्रदेश सरकार एक लाख रुपये का पुरस्कार देकर सम्मानित भी कर चुकी है। इससे साफ है कि अपना घर में सब कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से चलता रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्कूली छात्राओं व महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हंै। स्कूल एवं कॉलेज छात्राओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म, छेडख़ानी की घटनाएं कानून व्यवस्था की पोल खोल रही हैं।












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