खुद कभी रक्तदान नहीं करते डॉक्टर

चिकित्सालयों के ब्लड बैंक स्वयं सेवी संस्थाएं व जागरूक लोगों के मोहताज हैं जिनकी वजह से रक्त एकत्र हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डाक्टरों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।
वर्तमान समय में जिला चिकित्सालय बलरामपुर में 77 चिकित्सक कार्यरत हैं। 77 चिकित्सकों में कोई भी रक्तदान नहीं करता जबकि सभी दूसरों को नसीहत देते नजर आते हैं कि रक्तदान करों इससे कोर्ई कमजोरी नहीं आती। बलरामपुर चिकित्सालय में आयोजित रक्तदान शिविर में सीएमएस डॉ. ईश्वर शरण तक नजर नहीं आए। अस्पताल में लगे शिविर में महज 27 यूनिट ब्लड अस्पताल को मिला।
शिविर में अस्पताल की लाज बची रहे इसके लिए दो इंटर्न डॉक्टरों ने अपना रक्तदान कर दिया। इसके अलावा कोई भी कर्मचारी व डॉक्टर रक्तदान के लिए आगे नहीं आया। सीएमओ डा. एसएनएस यादव से जब यह पूछा गया कि उन्होंने अन्तिम बार रक्तदान कब किया था तो वह इसका उत्तर नहीं दे पाए उन्हें याद ही नहीं कि उन्होंने रक्तदान कब किया गया।
विश्व रक्तदाता दिवस पर उन्होंने ने भी रक्तदान नहीं किया। सीएमओ के अधीन करीब 165 चिकित्सक कार्य करते हैं जिसमें से एक भी डाक्टर रक्तदान के लिए आगे नहीं आया। यह कोई पहला मामला नहीं है हर बार ऐसा होता हैं। लोगों को जागरूक करने की बजाय खुद डॉक्टरों में जागरूकता लाने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय को प्रयास करना होगा। कमोवेश कुछ ऐसी स्थिति सिविल व लोहिया अस्पताल की भी रही। दोनों ब्लड में तकरीबन आठ-दस यूनिट रक्तदान हुआ वह भी स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से वरना एक यूनिट भी जुटा पाना मुश्किल हो जाता। अस्पताल के प्रभारियों ने न तो रक्तदान किया और न ही डॉक्टरों ने। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रक्तदान के लिए डॉक्टरों को प्रेरित किया जाएगा।
रक्तदान करने वाले डॉक्टरों का ब्यौरा
| अस्पताल | डॉक्टर | रक्तदान |
| बलरामपुर | 77 | 00 |
| सिविल | 69 | 00 |
| लोहिया | 103 | 00 |
| सीएमओ | 165 | 00 |












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