रेत माफिया के शिकार सिपाही के परिजन को दस लाख

आपको बता दें कि यमुना क्षेत्र में सक्रिय बालू माफियाओं ने सोमवार को तड़के हरियाणा पुलिस के एक सिपाही को रौंद डाला था। थाना सराय ख्वाजा की पीसीआर नंबर-दो पर तैनात महाबीर सिंह ने जब डंपर को रोकने की कोशिश की तो डंपर चालक ने सिपाही महाबीर को टक्कर मार दी। महाबीर सड़क पर गिर पड़ा औऱ वह डंपर के अगले व पिछले टायरों के नीचे पीस गया। जिसमें उसकी मौत हो गई। पर आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके बाद भी यमुना क्षेत्र में आज भी धड़ल्ले से बालू खनन का काम जारी है।
फरीदाबाद के स्थानीय निवासी ने वन इंडिया को बताया कि आप किसी भी समय वहां चले जाइए वहां रेत का खनन जारी मिलेगा। बस सोमवार की घटना के बाद इतना ही अंतर आय़ा है कि उनकी संख्या कुछ कम हो गई है पर अभी भी काफी माफिया इस खनन में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि रेत में केवल पैसा ही पैसा है। यहां एक ट्रैक्टर बालू की कीमत केवल पांच सौ रुपये ली जाती है। उसके बाद तीन सौ रुपये ठेकेदार लेता है। पर बाजार में इसकी कीमत 2500 से 3000 के बीच होती है। इसलिए इतने बड़े फायदे के लिए ही माफिया यहां ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रहते हैं। बताया जा रहा है कि बालू माफियाओं का पुलिस अधिकारियों के साथ भी यहां सांठगांठ रहती है जिससे दोनों मिलकर यमुना का दोहन करते हैं।












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