यूपी में तेजी से घट रही है लड़कियों की संख्या

वर्ष 2001 में हुई जनगणना में एक हजार पुरुषों के मुकाबले 898 महिलायें थीं। वर्ष 2011 में हुई जनगणना में यह अन्तर कम हुआ और एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या बढ़कर 908 हो गयी। 2001 की जनगणना में छह साल तक की लड़कियों की संख्या 916 थी जो 2011 में घटकर 899 रह गयी है। इसकी मुख्य वजह यह है कि आज भी लोग लिंग परीक्षण कराकर लड़कियों को दुनिया में आने से वंचित कर रहे हैं।
हाल ही में परिवार कल्याण मंत्री अहमद हसन ने भी कहा है कि लिंग परीक्षण रोकथाम के लिये केन्द्र सरकार का लिंग चयन प्रतिषेध कानून 1994 तथा भ्रूण हत्या को रोकने के वास्ते गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971 उत्तर प्रदेश में लागू है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग 12 जिलों में लड़कियों की संख्या में तेजी से गिरावट हो रही है और घट रहे शिशुओं के लिंगानुपात में असंतुलन बढ़ रहा है। लिंगानुपात में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में हालत और भी खराब
पूर्वी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों को सरकारी आंकड़ों में संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। हालिया जनगणना के आंकडों के अनुसार दोश में वर्ष 1991-2001 में शिशु लिंगानुपात में 18 प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई जबकि 2001-2011 में यह गिरावट 13 प्रतिशत दर्ज की गयी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1991-2001 में यह गिरावट 11 प्रतिशत थी जबकि 2001- 2011 में गिरकर लिंगानुपात 17 फीसदी हो गया।
कुल मिलाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और कन्या भू्रण हत्या में इजाफा हुआ है। कन्या भू्रण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए लिंग की जांच करना प्रतिबंधित है। कानून प्रभावी होने के बावजूद आज तक इसके तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग किसी भी जिले में एक भी कार्रवाई नही हुई है।












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