इंजीनियरिंग में सिब्बल के सुधार की हवा निकली

इंजिनियरिंग में दाखिले के लिए एकल एंट्रेंस के खिलाफ आईआईटी कानपुर ने बगावत कर दी है। आईआईटी की 60 सदस्यीय सेनेट ने 2013 में दाखिले के लिए अलग से एंट्रेंस टेस्ट लेने का फैसला लिया है। सेनेट का कहना है कि वह सभी आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में शामिल नहीं होगा। काउंसिल की एकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली और बोर्ड परीक्षा के अंकों को वेटेज देने के फैसले को खारिज करते हुए सीनेट ने इसकी वजहें भी गिनाईं।
आईआईटी काउंसिल की मंजूरी के बाद मानव संसाधन मंत्रलय ने सभी केंद्रीय संस्थानों की एकल प्रवेश परीक्षा और इंटरमीडिएट के 40 फीसदी अंकों का वेटेज देने का फैसला किया था। कानपुर समेत अन्य पांच आईआईटी इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन इसे नजरंदाज करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा था कि नई व्यवस्था हर हाल में 2013 से लागू होगी। इस बीच, सिब्बल मंत्रलय के शीर्ष अधिकारियों के साथ अमेरिका रवाना हो गए और उनकी वापसी के बाद ही मंत्रलय रुख तय करेगा।
सेनेट की बैठक में भाग लेने वाले प्रोफेसर दीपक गुप्ता ने कहा, '2013 के एंट्रेंस टेस्ट में देशभर के छात्र भाग ले सकेंगे। कॉमन एंट्रेंस का मंत्रालय का प्रपोजल 2014 तक टल सकता है। हम अलग से एंट्रेंस टेस्ट लेंगे। इसके लिए एग्जाम कमिटी बनाई जा रही है।' सीनेट के कुछ सदस्यों का कहना है कि आईआईटी कानपुर की सीनेट को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने काउंसिल से ज्यादा शक्ति दी है। लिहाजा पहले चरण में स्थापित सभी आईआईटी, काउंसिल के ऐसे फैसले मानने को बाध्य नहीं हैं।












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