सचिन सांसद तो बन गए पर नहीं बन सकते मंत्री

यह सचिन की कोई कमजोरी नहीं बल्कि संविधान में ही ऐसी व्यवस्था है कि कोई भी राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य सांसद तो होगा पर वह मंत्री नहीं बन सकता। यदि उसे मंत्री बनना है तो उसे पहले इस पद से मुक्त होना पड़ेगा और उसे राज्यसभा या फिर लोकसभा से चुनकर आना पड़ेगा।
संविधान के तहत सचिन को वे सारी सारी सुविधाएं मिलेंगी जो एक निर्वाचित सदस्य को मिलती हैं। राज्यसभा की वे प्रत्येक कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। उपराष्ट्रपति के चुनाव में वे अपनी भागीदारी कर सकते हैं।
सचिन को संसदीय समितियों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का मौका मिल सकता है। पर वे राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं ले सकते न ही सचिन को उनके कार्यकाल के दौरान मंत्री बनाया जा सकता है।
वैसे सचिन शपथ ग्रहण के बाद यह जानकारी लेने में नहीं चूके कि राज्यसभा में उनकी सीट कहां होगी। सरकार ने सचिन को फिल्म अभिनेत्री रेखा और उद्योगपति एवं समाजसेवी अनु आगा के साथ राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। 26 अप्रैल को राज्यसभा के लिए मनोनीत हो चुके मास्टर ब्लास्टर ने हिंदी में शपथ लेकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की।
संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ल एवं हरीश रावत और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायण सामी के साथ सचिन राज्यसभा के सभापति मो. हामिद अंसारी के संसद भवन स्थित कार्यालय पहुंचे। पत्नी डा. अंजलि भी उनके साथ थीं।
शपथ ग्रहण की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सचिन ने कहा कि राज्यसभा आना उनके लिए गौरव की बात है, लेकिन क्रिकेट उनकी प्राथमिकता पहले की ही तरह बनी रहेगी। राज्यसभा में मनोनयन को सम्मान बताते हुए उन्होंने दूसरे खेलों को मदद करने की बात भी की।












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