केजरीवाल के लिए सदमे की तरह था आंदोलन

Arvind Kejriwal
दिल्ली (राजेश केशव)। टीम अन्ना के सक्रिय सदस्य अरविंद केजरीवाल के लिए 3 जून का आंदोलन किसी सदमे से कम नहीं था। एक तरफ जहां मंच पर ही बाबा रामदेव ने उन्हें मुलायमियत से ही सही नसीहत दे डाली तो वहीं बुलंदशहर के एक युवक ने आंदोलन के दौरान ही आत्महत्या का प्रयास करके अरविंद को झकझोर दिया। हालांकि युवक को बचा लिया गया पर अरविंद फिर आंदोलन के मंच से उठ कर चले गए। पर उनके जाते ही मंच पर सियापा फैल गया और रामदेव-अरविंद के संबंधों को लेकर नई कहानी शुरू हो गई।

3 जून को जंतर मंतर पर बाबा रामदेव द्वारा आहूत आंदोलन में करीब 8 से 10 हजार लोग एकत्रित हुए थे। पर इस भीड़ में अन्ना के आंदोलन कर्मी कम बाबा रामदेव के संत ज्यादा दिखे। इसीलिए बाबा का जोश भी कुछ ज्यादा ही दिखा क्योंकि आठ घंठे के आंदोलन में बाबा ने कम से कम पांच बार माइक पकड़ा और यही कारण रहा कि वे मंच पर ही अरविंद तक को टोकने से बाज नहीं आए।

हालांकि दोनों लोग देर रात तक अपने संबंधों को सामान्य बताने में लगे रहे। वैसे अन्ना ने जरूर इन संबंधों पर पानी डालने का प्रयास किया और कहा कि बाबा के साथ आ जाने से उनकी ताकत बहुत बढ़ गई है, लेकिन यह एकता हकीकत में दिखाई नहीं दी। एक तरफ रामदेव खुद बार-बार सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लेकर उन्हें निशाना बनाते रहे, लेकिन केजरीवाल को भ्रष्ट नेताओं के नाम लेने के लिए टोक दिया।

केजरीवाल ने जैसे ही बोलना बंद किया, रामदेव माइक संभाल कर बोले, तय हुआ था कि आज किसी का नाम नहीं लिया जाएगा, लेकिन केजरीवाल जी ने नाम लिए। ये उनका अपना फैसला है। रामदेव के ऐसा कहने के बाद केजरीवाल मंच से उठकर चले गए। नाराजगी के कारण केजरीवाल के धरने से चले जाने की बात से हालांकि दोनों पक्षों ने इन्कार किया। खुद रामदेव ने बाद में मंच से कहा, अरविंद ने जाने से पहले मुझसे और अन्नाजी की इजाजत ली थी। इस विवाद पर टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने भी सफाई दी कि केजरीवाल मधुमेह के मरीज हैं। उन्हें कुछ दिक्कत हो रही थी। इसलिए वे अन्ना और बाबा की इजाजत लेकर गए। इससे पहले अन्ना सुबह सवा नौ बजे ही
रामदेव के धरने में शामिल हो गए थे।

उनके सभी प्रमुख सहयोगी किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सुनीता गोधारा राजघाट से ही उनके साथ थे। संसद मार्ग पर धरना स्थल पर टीम अन्ना के सदस्य पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण भी पहुंच गए। केजरीवाल सहित अन्य सदस्यों के हाव-भाव से जाहिर था कि वे यहां बहुत सहज नहीं हैं।

वहीं अरविंद के सामने 3 जून को एक और संकट सामने आया। खुद को टीम अन्ना का सदस्य बताने वाले 30 साल के एक बुलंदशहर के एक युवक ने आत्मदाह करने की कोशिश की और कार्यकर्ताओं पर सवाल पूछने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया। टीम अन्ना की टी-शर्ट और अन्ना के नाम की टोपी पहने सलीम अली ने प्रदर्शन स्थल पर दोपहर करीब 12.15 बजे उस वक्त अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़क लिया, जिस समय रामदेव के एक करीबी सहयोगी काले धन पर बोल रहे थे।

पुलिस ने कहा कि वह रामदेव से पूछना चाहता था कि वह पिछले साल पुलिस की कार्रवाई के बाद रामलीला मैदान से महिला के वस्त्रों में क्यों भाग खड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि अली हजारे से मनसे प्रमुख राज ठाकरे को उनके समर्थन के बारे में पूछना चाहता था। उसने जोर-जोर से मांग की कि उसे बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। हजारे और रामदेव ने उसकी बात भी सुनीं, लेकिन तब तक रामदेव समर्थक उसे वहां से ले गए। उसने इस दौरान टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल पर बात नहीं सुनने का और र्दुव्येवहार करने का आरोप लगाया। बाद में उसे पुलिस अपने साथ ले गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने उसे समझाया है और मेडिकल जांच के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा।

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