रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की गोली मारकर हत्या

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। घटना के बाद मुहल्ले में पहुंची पुलिस को भी स्थानीय लोगों के प्रतिरोध का सामना करना पडा। बिहार में प्रतिबंधित जातीय संगठन रणवीर सेना पर कई जातीय नरसंहारों को अंजाम देने का आरोप है। सिंह पर इन नरसंहारों की साजिश रचने का आरोप था। रणवीर सेना के प्रमुख के रूप में नरसंहार से संबंधित 22 मामलों में से 16 में सिंह बरी हो चुके थे और छह में जमानत पर थे।
ब्रह्मेश्वर मुखिया सुबह टहलने निकले थे उसी समय हमलावरों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। जिसके कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गयी। वे जेल में 9 साल तक सजा काटने के बाद जले से रिहा हुए थे। उन्होंने किसानों के लिए एक गैर राजनीति पार्टी बनाई थी। माओवादियों आदि से निपटने के लिए उन्होंने एक प्राइवेट सेना भी तैयार कर रखी थी।
ब्रह्मेश्वर मुखिया के संगठन का नाम कई बड़े नर संहारों से जोड़ा गया जिनमें लक्ष्मणपुर बाथे में 61 दलितों की हत्या और 1996 में बथानी टोला में 21 लोगों की हत्या सबसे कुख्यात था। आपको बता दे कि बिहार में रणवीर सेना एक ऊंची जातियों का संगठन माना जाता है। जाति संघर्ष के दौर में इस सेना का गठन किया गया था। कई बड़े नरसंहारों में इस सेना का हाथ माना जाता है।












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