दो साल की मासूम की गुहार, मम्मी मुझे घर ले चलो

जी हां अस्पताल में भर्ती दो साल की मासूम बच्ची रह रहकर अपने पापा-मम्मी को पुकार रही हैं, इसके अपनों से बिछड़ने की पीड़ा वार्ड में हर किसी की आंखे नम कर रही हैं। भले ही जन्म देने वाले इस मासूम को लेने नहीं आ रहे हैं, लेकिन वार्ड में इसका लांड-दुलार करने वालों की कमी नहीं हैं। कोई इसको बिस्किट खिल रहा है तो कोई इसको चाकलेट लाकर दे रहा है, लेकिन मासूम की आंखे तो मां बाप का प्यार पाने के लिए तरस रही हैं।
यह मामला राजस्थान की झुंझुनूं का है जोकि देश भर में कन्या भ्रूण हत्या के लिए जाना जाता है। यहां बसई गांव की रोही में एक कुंए से निकाली गयी दो साल की मासूम घायल को अस्पताल में भर्ती कराए दो साल हो गया हैं, लेकिन इसके अपनों का दिल अभी भी नहीं पसीजा हैं। इस मासूम को बीडीके अस्पताल में भर्ती कराये दो दिन हो गये है। प्रशासन ने बच्ची की देख भाल के लिए महिला पुलिसकर्मी सुआ देवी की विशेष ड्यूटी लगा दी हैं।
फौजी का पसीजा पसीना
मासूम को साठ फीट गहरे कुंए से निकालकर अस्पताल पहुचाने वाला गांव टिब्बा निवासी फौजी मालाराम गुर्जर उससे पलभर भी दूर नहीं जा पा रहा हैं। जम्मू कश्मीर के नौसेरा में नायक पद पर तैनात मालाराम इन दिनों छुट्टियों में गांव आया हुआ हैं। मालाराम और कुछ अन्य युवक अस्पताल में बालिका के पास ही रह रहे हैं।
कहीं इस मासूम की कहानी पिछले दिनों एम्स में भर्ती 'बेबी फलक' की तरह तो नहीं?












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