सरकार को पता नहीं, विदेश में कितना है काला धन

सन 2006 में 23,373 करोड़ रुपए से कम होकर 2010 में यह 9295 रह गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसमें सबसे कम भारतीयों का धन है। कालेधन से निपटने के लिए सरकार ने पांच सुत्रीय रणनीति भी तैयार की गयी है। 97 से ज्यादा पन्नों के इस श्वेत पत्र में ब्लैक मनी का आंकड़ा नहीं बताया गया है। देश में सबसे ज्यादा खरीद-फरोख्त से काला धन का इस्तेमाल किया जाता है।
रीयल स्ट्रेट और ज्वैलरी की खरीद में सबसे ज्यादा काले धन का इस्तेमाल किया जाता है। केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक एपी सिंह कह चुके है कि विदेश में भारतीयों का 24.5 लाख करोड़ रुपये काला धन जमा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह बयान आया था। कालेधन पर सरकार ने कोरा कागज पेश किया है, सरकार के पास कोई आकड़ा नहीं है।
श्वेत पत्र में बताया गया है कि काले धन के मामले पर विश्व में भारत 15वें स्थान पर है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष की अगेवाई में आठट सदस्यीय टीम ने यह रिपोर्ट पेश की है। सरकार ने पिछले साल इस समिति का गठन किया था। सरकार ने कालेधन का आंकलन करने के लिए तीन अलग-अलग संस्थाओं को जिम्मेदारी दी है। उसके नाम नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फाइनांस एंड मैनेजमेंट, नेशनल काउंसिल फॉर अप्लायड इकॉनॉमिक रिसर्च और नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक फाइनांस एंड पॉलिसी है।












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