20 करोड़ लोगो को सत्य की राह दिखाए बाबा जयगुरूदेव

बाबा जय गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने के बाद अलीगढ़ का गांव चिरौली भी सुर्खियों में आ गया है। ये वहीं गांव है जहां से बाबा जयगुरूदेव गुरूदीक्षा लेकर दुनिया को सत्य का रास्ता दिखाने निकल पड़े। यह गांव बाबा जयगुरूदेव के गुरू और संत घूरेलाल महाराज का है। दादा गुरू का आश्रम भी यही है, यहा तमाम अनुयायी आते रहते है। बरसों तक बाबा जयगुरूदेव ने गांव की एक झोपड़ी में रहकर गुरू की सेवा की।
अलीगढ़ से 25 किलोमिटर दूर गांव चिरौली में संत घूरेलाल महाराज (दादा गुरू) रहा करते थे। उनको ईश्वरीय शक्ति प्राप्त बताया जाता है। बाबा जयगुरूदेव चिरौली में दीक्षा लेकर और छोटी से झोपड़ी में रहकर, बरसों तक दादा गुरू की सेवा की। उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान हासिल किया। संत महाराज घूरेलाल महाराज के शरीर त्यागने के बाद, गांव में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। शिष्य बाबा जयगुरूदेव गुरू की अस्थि लेकर मथुरा चले गये और यही गुरू की समाधि बनाई। यहां एक विशाल आश्रम भी बनाया गया।
उसके बाद बाबा जयगुरूदेव धर्म कार्य में लगकर लोगों को सत्य का रास्ता दिखाने लगे। धर्म कार्य से बाबा के करोड़ो अनुयायी बने। गांव में दादा गुरू के आश्रम को राधास्वामी सत्संग भवन के नाम से जाना जाने लगा। उनके भक्तों के द्वारा बाबा की उम्र 116 साल बताई जा रही है। बाबा अपने भक्तों को सत्य के रास्ते पर चलने, मांस, और नशा से दूर रहने को कहा करते थे। उनके अनुयायी उनके आज्ञा का बखूबी पालन भी करते थे।












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