राष्ट्रपति चुनाव- खुद की पैरवी कर रहे पीए संगमा

इसी कड़ी में गुरुवार को दो राजनीतिक दलों ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजद नेता नवीन पटनायक औऱ तमिलनाडु की मुख्यमंत्री औऱ अन्नाद्रमुक नेता जे जयललिता ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। इन दोनों दलों ने आदिवासी नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा में अपनी आस्था व्यक्त की। हालांकि खुद पीए संगमा की पार्टी एनसीपी ने इस मुद्दे पर अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं वैसे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने फिलहाल संगमा की दावेदारी को खारिज कर दिया है।
उधर, बीजद और अन्नाद्रमुक द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किए जाने पर पीए संगमा खुश हैं औऱ उन्होंने अन्य दलों से अपील की है कि वे भी एक आदिवासी को राष्ट्रपति पद के लिए अपना समर्थन दें। उन्होंने कहा, मैं इस बात से बहुत खुश हूं और मैं दोनों नेताओं का शुक्रगुजार हूं। वे हमारी आदिवासी भावनाओं के प्रति प्रतिक्रियाशील रहे।
इसलिये भारत के 10 करोड़ आदिवासियों की तरफ से मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं। संगमा ने अन्य राजनीतिक दलों से भी अपील की कि इस दिशा में आगे बढ़े और आदिवासी हितों का समर्थन करें।
सूत्रों ने बताया कि कुछ दिनों तक पूरी तरह से राजनीति से दूर रहने वाले संगमा अचानक कैसे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन बैठे यह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ सियासी लोगों का कहना है कि इस काम में स्वयं उनकी बेटी और राज्यमंत्री अगाथा संगमा भूमिका निभा रही हैं।
वहीं कुछ सियासी दलों के बड़े नेताओं ने भी अप्रत्यक्ष रूप से उनको मौन स्वीकृति दे दी है पर वे भी अपने दलों की तरफ से अभी समर्थन देने में
हिचकिचा रहे हैं। पर कुछ भी कहिए अगाथा संगमा ने अपने पिता के लिए एक लंबी लकीर खींच दी है जिससे आने वाले दिनों में संगमा एक प्रबल दावेदार हो सकते हैं।
उधर, राष्ट्रपति के लिए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी अंदर ही अंदर चाले चलने शुरू कर दिए हैं। वे कई राजनीतिक दलों के संपर्क में हैं। वैसे इन सभी लोगों के बीच प्रणब दादा एक ऐसे उम्मीदवार हो सकते हैं जिसपर किसी दल को शायद ही आपत्ति हो।












Click it and Unblock the Notifications