सांसदों ने कार्टून विवाद पर बनाया संयुक्त मोर्चा

संसद में कार्टून विवाद को लेकर अभी खिचखिच जारी है। अंबेडकर के कार्टून विवाद के बाद अब एनसीईआरटी की ही 9वीं कक्षा की किताब के कार्टूनों को लेकर पूरी लोकसभा गर्म है। विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी कहा कि एनसीईआरटी की सरकारी पुस्तकें आपत्तिजनक है और कार्टूनों के जरिए राजनीतिज्ञों के खिलाफ जहर घोल रही हैं। राजद के लालू प्रसाद ने कहा कि जब कोई अकेला फंसता है तो सब मजा लेते हैं और कहते हैं कि वह फंस गया, वह फंस गया, लेकिन आज सब फंसे तो सब एक हो गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जो बच्चे उन्हें देख और पढ़ लिए हैं उनके दिमाग से वह कैसे वापस होगा? लालू ने कहा कि जब पूरे राजनीतिक वर्ग पर हमला हुआ है तब सब की आंखें खुल रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पाठ्य पुस्तकों के जरिए हमारे बच्चों के मन में हमें हंसी का पात्र बनाया जा रहा है। सदन के नेता प्रणब मुखर्जी द्वारा इन कार्टूनों को पाठ्य पुस्तकों से वापस लिए जाने की घोषणा पर उन्होंने कहा, इन कार्टूनों को तो वापस ले लिया गया है, लेकिन जो बच्चे इन किताबों को अपने घर में रख लिए हैं या उनकी फोटोकापी बनवा लिए हैं वे कैसे वापस होंगी।
हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करेगी और सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में भी व्यक्ति, धर्म या समुदाय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखा जाए। खुद नेता सदन प्रणब ने मामले को संभालने की कोशिश की, लेकिन कार्यवाही नहीं चल पाई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने मुलायम सिंह, शरद यादव, यशवंत सिन्हा, गुरुदास दासगुप्ता, संजय निरुपम समेत हर किसी ने सवाल उठाया कि सरकारी पुस्तकों में ऐसी सामग्री क्यूं पढ़ाई जा रही है। पुराने जमाने के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट शंकर और इरफान के ये कार्टून विचारों की स्वतंत्रता के लिहाज से ठीक हैं, लेकिन यह परिपक्व लोगों के लिए हैं। बच्चों को ऐसे व्यंग्य वाले कार्टून पढ़ाए जाएंगे तो राजनीति और लोकतंत्र के लिए खतरा है।












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