बच्चों की सुरक्षा करेगी विशेष किशोर पुलिस

बच्चों के शोषण के मामले में ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि दोषी व्यक्ति की गिरफ्तारी तुरन्त हो और कानूनी नियमों के अनुसार उस पर केस दर्ज हो। उन्होंने बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए नामित किए गए पुलिस अधिकारियों को किशोर न्याय अधिनियम की जानकारी दी गई। ये अधिकारी गुमशुदा बच्चों की पूरी जानकारी का रिकार्ड रखेंगे और मामले की जांच कर उन्हें ढूंढने का काम भी करेंगे। थानों में तैनात ये अधिकारी विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं और सरकारी संस्थाओं के सम्पर्क में रहकर बच्चों के खिलाफ शोषण, बच्चों की नजरबंदी और बच्चों की तस्करी आदि के मामलों को देखेंगे। विशेष किशोर पुलिस इकाई जिला में कार्यरत विभिन्न संस्थाओं का रिकार्ड भी अपने पास रखेंगी। विशेष पुलिस इकाई स्थापित करने का उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षा के साथ-साथ रहने का स्वस्थ वातावरण उपलब्ध करवाना है।
ये अधिकारी बच्चों से जुड़े प्रत्येक मामले की गंभीरता से जांच करेंगे। बच्चों के मामलों में पूरी तरह से सावधानी बरती जाएगी। कानूनी नियमों के अनुसार किसी भी मामले में बाल अपराधी को न तो गिरफ्तार किया जा सकता है और न ही उसे जेल में भेजा जा सकता है। इस तरह के मामलों में बाल अपराधी को किशोर कोर्ट में पेश कर बाल सुधार गृह में भेजा जा सकता है। बाल पीडि़त के मामलों में भी पुलिस को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। नियुक्त किए गए सभी किशोर सुरक्षा पुलिस अधिकारियों को इस प्रकार के मामलों की पूरी जानकारी दी गई है।
किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार बच्चे से अगर पूछताछ की जरूरत पड़ती है तो उसे थाने में न बुलाकर अधिकारी स्वयं बच्चे के घर जाकर पूछताछ करेगा। लड़की के मामले में महिला पुलिसकर्मी की उससे पूछताछ कर सकती है। बच्चों के मामले को देखने वाले पुलिस अधिकारी का आम कपड़ों में होना अनिवार्य है। अगर किसी बच्चे को किसी बाल गृह में भेजा जाता है तो यह अधिकारी पूरी जांच कर सुनिश्चित करेंगे कि उस जगह पर उक्त बच्चे को कोई परेशानी नहीं होगी। बच्चे को वहां उचित पेयजल व खाने की व्यवस्था के साथ-साथ आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा, शौचालय और फोन आदि की सुविधा भी प्राप्त होगी।












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